कैलाश का सिंधिया को समर्थन, राहुल पर तंज

कैलाश का सिंधिया को समर्थन, राहुल पर तंज

इंदौर।आकाश धौलपुरे।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव इंदौर के पितृ पर्वत पर बाबा हनुमान की अष्टधातु की विश्व की सबसे बड़ी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के संबंध में आज पत्रकारों से मुखातिब हुए। उन्होंने बताया कि पितृ पर्वत पर होने वाला आयोजन किसी छोटे कुंभ से कम नहीं होगा। इसमें देशभर के साधु संत सहित कई बड़ी हस्तियां शिरकत करेंगी। कैलाश विजयवर्गीय की माने तो इसके लिए गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी नाम दर्ज कराया गया है। उधर राहुल गांधी द्वारा पुलवामा अटैक को लेकर बीजेपी सरकार पर साधे गए सवालों पर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह राहुल की नादानी है। उन्हें इस बात की अक्ल नहीं कि कब किस समय पर कौन से सवाल उठाने चाहिए।

दरअसल, राहुल गांधी ने पुलवामा अटैक को लेकर हुई जांच और इसके पीछे किसको फायदा पहुंचा सहित तीन सवाल उठाए हैं । वही ज्योतिरादित्य सिंधिया के हालिया ट्वीट पर विजयवर्गीय ने कहा कि सरकार को अपना घोषणा पत्र में किए वादों को पूर्ण करना चाहिए। इससे आप खुद ही समझ लीजिए कि सरकार की हालत क्या है।

इधर, पुलवामा अटैक की पहली बरसी पर जहा देश , शहीदों को नमन कर याद कर रहा है वही अटैक की बरसी पर राजनीति भी शुरू हो गई है दिग्विजयसिंह द्वारा ट्वीट कर सरकार पर तंज कसा की केंद्र सरकार को खुफिया जानकारी होने के बावजूद पुलवामा जैसा अटैक होना बड़े शर्म को बात है वही राहुल गांधी के अटैक पर सरकार से पूछे गए के सवाल पर भाजपा के महासचिव से पूछा गया तो उनका कहना था कि कुछ विषय ऐसे होते है कि उस पर राजनीति नही करनी चाहिए राहुल गांधी जी नादान है में नादान नही हु के उनके प्रश्न के जवाब दु मुझे नही लगता कि ऐसे प्रश्न पूछना भी चाहिए ये नादानी भरे प्रश्न है उनके इसके जवाब देने की भी कोई आवश्यकता भी नही है। दिग्विजयसिंह के सवाल पर भी कहा कि ऐसे नादानी भरे प्रश्न नही करनी चहीए देश की राजनीति में ओर भी कई समस्याएं है कम से कम सुरक्षा को लेकर सेना के ऊपर कोई प्रश्नचिन्ह नही उठाना नही चाहिए।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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