लॉकडाउन: डोर टू डोर अनिवार्य वस्तुओं को पहुंचाने की कवायद में जुटा प्रशासन

लॉकडाउन: डोर टू डोर अनिवार्य वस्तुओं को पहुंचाने की कवायद में जुटा प्रशासन

इंदौर।आकाश धोलपुरे।

कोरोना वायरस संक्रमित मरीज़ो की संख्या इंदौर में लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते प्रशासनिक अधिकारियों की भी चिंता बढ़ा रही है। एक तरफ जहां लोगों को कर्फ्यू के दौरान छूट वाले समय में कम से कम बाहर निकालने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा ऑड और इवन नंबर फार्मूला 28 मार्च से लागू किया जाएगा। वहीं अब नगर निगम ने भी वार्ड स्तर पर आवश्यक सेवाओं की पूर्ति के लिए मैदान संभाल लिया है। अब निगम डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की तर्ज पर डोर टू डोर सब्जी, किराना, दूध और फल जे विक्रय और वितरण करवाने की कवायद में जुट गया है।

इंदौर नगर निगम के आयुक्त आशीष सिंह ने शहर को पांच झोन में बांट कर हर जोन का इंचार्ज 1 अपर आयुक्त को बनाया है। सभी अपर आयुक्त अपने स्तर पर सीएसआई, जेडों,और वॉर्ड स्तर के कर्मचारियों की बैठक लेकर उन्हें प्रक्रिया के संचालन की समझाइश दे रहे हैं। इसी कड़ी में निगम के अपर आयुक्त देवेंद्र सिंह ने आज झोन 8 में बैठक लेकर निगम कर्मचारियों को वॉर्ड स्तर पर आयुक्त के निर्देशों का सख़्ती से पालन करवाने के निर्देश दिए। इस दौरान कर्मचारियों को यह भी बताया गया कि आदेश की अवहेलना करने वाले और काम में लापरवाही करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के साथ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।

अपर आयुक्त के मुताबिक शहर के हर वार्ड में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की तर्ज पर सब्जी, किराना, दूध और फल के लिए वाहन चलाए जाएंगे, ताकि लोग कम से कम घरों से बाहर निकले और कोरोना वायरस संक्रमण पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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