मालवा-निमाड़ में इस बार कम बारिश के बाद आने वाली गर्मी में पानी की कमी की आशंका जताई जा रही है। दरअसल नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने लोगों से अभी से पानी बचाने और रोजमर्रा के कामों में उसका दोबारा इस्तेमाल करने की अपील की है। वहीं उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर बताया कि उनके घर में RO से निकलने वाले वेस्टेज पानी को टंकी में जमा किया जाता है। इस पानी का इस्तेमाल कपड़े धोने, फर्श साफ करने और बागवानी जैसे कामों में किया जा रहा है।

दरअसल मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि इस बार मालवा-निमाड़ में करीब 21 से 22 इंच बारिश हुई है। उन्होंने कहा कि दिवाली तक एक-दो इंच अतिरिक्त बारिश होने की संभावना भी कम है। ऐसे में उपलब्ध पानी से आने वाली गर्मी तक काम चलाना पड़ सकता है। कम बारिश का असर नर्मदा नदी के जलस्तर, तालाबों में जमा पानी और जमीन के भीतर के जलस्तर पर भी पड़ सकता है। इसी आशंका को देखते हुए उन्होंने लोगों से पानी की बर्बादी रोकने और घरों में पानी बचाने के तरीके अपनाने को कहा है।

कैलाश विजयवर्गीय ने बताया RO के वेस्टेज पानी को बचाने का तरीका

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने घर का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां दो RO लगे हैं। उनके मुताबिक परिवार में करीब 25 से 30 लोग रहते हैं और रोजाना 300 से 400 लोग मिलने भी आते हैं। ऐसे में पीने के पानी की जरूरत काफी रहती है। उन्होंने बताया कि RO से एक गिलास पीने योग्य पानी तैयार होने पर करीब दो गिलास पानी वेस्टेज के रूप में निकलता है। आमतौर पर यह पानी वॉश बेसिन के रास्ते नाली में बह जाता है।


उन्होंने इस पानी को बचाने के लिए घर में एक टंकी रखवाई है और RO से निकलने वाली वेस्टेज पाइप को उससे जोड़ दिया है। इससे पानी बेकार बहने के बजाय जमा हो जाता है। कैलाश विजयवर्गीय के मुताबिक इस जमा पानी का इस्तेमाल कपड़े धोने, फर्श साफ करने, बर्तन धोने और बागवानी में किया जाता है। इस तरह जिस पानी को पहले बेकार समझकर बहा दिया जाता था उसका दोबारा उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने लोगों को भी अपने घरों में इसी तरह की व्यवस्था करने और पानी की बर्बादी कम करने की अपील की है।

कम बारिश के बाद गर्मी में पानी की चिंता

दरअसल कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इस बार मालवा-निमाड़ में बारिश कम हुई है। उनके बताए आंकड़े के मुताबिक क्षेत्र में करीब 21 से 22 इंच बारिश दर्ज हुई है। उन्होंने दिवाली तक ज्यादा बारिश की उम्मीद भी कम जताई है। ऐसे में आने वाले महीनों में पानी का इस्तेमाल सोच-समझकर करना जरूरी हो सकता है। बारिश की कमी का असर केवल घरों में होने वाली पानी की खपत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि नदी, तालाब और जमीन के भीतर मौजूद पानी की स्थिति पर भी पड़ सकता है।