प्रदेश की पहली फुल मैराथन में 20 हजार से ज्यादा धावक हुए शामिल

प्रदेश की पहली फुल मैराथन में 20 हजार से ज्यादा धावक हुए शामिल

इंदौर।

प्रदेश की पहली फुल मैराथन रविवार सुबह इंदौर में आयोजित हुई। इस मैराथन में 42, 21, 10 और पांच किलोमीटर की चार कैटगरी में लगभग 20 हजार धावकों ने हिस्सा लिया। मैराथन के दौरान बोतलों और जूस के पैकेट वगैरह से शहर में गंदगी न हो इसलिए सफाई के विशेष इंतजाम किए गए थे। यह प्रदेश की पहली फुल मैराथन थी। फुल मैराथन यानी 42 किमी रन। इसके साथ 21 किमी की हाफ मैराथन और 10 व 5 किमी रन भी हुई। मैराथन में प्रोफेशनल रनर्स के अलावा अलावा बहुत से ग्रुप्स और संस्थाओं के मेम्बर्स भी दौड़े। मदर्स का ग्रुप अपने न्यू बॉर्न बेबीज के साथ दौड़ा। दिव्यांग बच्चों ने भी दौड़ में उत्साह से हिस्सा लिया। इसके साथ ही किडनी और नी ट्रांसप्लांट करा चुके लोगों ने भी इस रन में हिस्सा लिया। नेहरू स्टेडियम से सुबह 4.30 बजे 42 किलोमीटर की फुल मैराथन प्रारंभ हुई। इसके बाद सुबह 6.15 बजे 21 किलोमीटर और 6.45 बजे 10 किलोमीटर की दौड़ प्रारंभ हुई। वहीं 5 किमी रन सुबह 8.30 बजे राजबाड़ा से प्रारंभ हुई। सभी मैराथन नेहरू स्टेडियम पर समाप्त हुई।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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