पालकों ने रोका सीएम का काफिला, कार से उतरे सिंधिया तो हाथ जोड़कर लगाई गुहार

पालकों ने रोका सीएम का काफिला, कार से उतरे सिंधिया तो हाथ जोड़कर लगाई गुहार

इंदौर, आकाश धोलपुरे| सांवेर विधानसभा में आयोजित सभा से लौट रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) और राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के काफिले को स्कूलों की मनमानी से परेशान पालकों ने रोक लिया| इस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया गाड़ी से उतरे तो एक पालक उनके पेर पड़कर और हाथ जोड़कर गुहार लगाईं कि हमारे बच्चों को प्रताडि़त कर रहे है, मैं आपके हाथ जोड़ता हुं पैर पड़ता हु। जिसके बाद कार में बैठे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिंधिया को इशारा करते हुए गाड़ी के अंदर बुलाया और रवाना हो गए।

दरअसल, शनिवार को जागृत पालक संघ (जागो पालक जागो) के नेतृत्व में पालकों ने सांवेर की सभा से लौटते समय मुख्यमंत्री का काफिला रोककर स्कूलों की मनमानी और सरकार की अनदेखी के सम्बंध में ज्ञापन सौंपा । इस दौरान मुख्यमंत्री गाडी में बैठे रहे, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गाडी से उतरकर अभिभावकों से ज्ञापन लेकर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है। पालकों का कहना है कि यदि जल्द ही सरकार इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेकर पालकों को राहत नहीं देती है तो जल्द ही पालकों द्वारा बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

स्कूलों की मनमानी से परेशान अभिभावक
इंदौर में निजी स्कूलों की मनमानी इस कदर हावी है कि कोरोना काल मे बेरोजगार हुए पालकों की लाख मिन्नतों के बाद भी स्कूल किसी फायनेंस कंपनी की तर्ज पर अलग अलग बहानो से पालकों पर फीस भरने का दबाव बना रहे है। पालकों ने ज्ञापन के जरिये ये मांग भी उठाई कि जब बच्चे स्कूल नही जा रहे है और ऑनलाइन क्लास जारी है बावजूद इसके पालकों पर दबाव बनाया जा रहा है। इससे पहले भी इंदौर में महिला ने सीएम का काफिला रोककर फीस माफ करने की मांग की थी।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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