नासमझी की हद पार, इंदौर में निकला जुलूस, बजे ढोल नगाड़े

नासमझी की हद पार, इंदौर में निकला जुलूस, बजे ढोल नगाड़े

इंदौर/आकाश धौलपुरे। जनता कर्फ्यू के दौरान पीएम मोदी ने थाली बजाकर उन लोगों का आभार व्यक्त करने की अपील की थी जो हमारे लिये अपनी जान खतरे में डालकर काम कर रहे हैं। लेकिन इंदौरवासियों को कुछ ऐसा जुनून चढ़ा कि वो इसे कोई जश्न समझ बैठे।

रविवार शाम 5 बजे सबको अपने अनपे घरों में ही रहकर ताली, थाली या घंटी बजाकर उत्साहवर्धन और आभार जताना था। लेकिन कुछ लोगों को देखकर ये लगा जैसे वो इंडिया के वर्ल्ड कप जीतने का जश्न मना रहे हैं।  ये वो ही लोग थे जो सुबह से लेकर शाम तक  पीएम की एक अपील पर अपने घरों में कैद थे लेकिन जब बात आई ताली बजाने की तो ये जुलूस की शक्ल में निकल पड़े शहर के ह्रदय स्थल राजबाड़ा सहित पाटनीपुरा पर। यहां किसी के हाथ में भारत का झंडा था तो कोई ढोल नगाड़े बजा रहा था, इतना ही नहीं कुछ लोग तो बाकायदा नाच भी रहे थे। इस भीड़ को देखकर लग रहा था जैसे वो कोई उत्सव मना रहे हो। ऐसे संकट के समय जब जरूरत जब सोशल डिस्टेंसिंग की है, ये लोग इस तरह झुंड बनाकर निकले जैसे कोरोना खतरे की नहीं बल्कि जलसे की वजह हो।

इस नादानी में ये लोग भूल गए कि हो सकता है अभी जरूरत है कम्युनिटी डिस्टेंस की मतलब सामाजिक और सामूहिक दूरी की। 30 लाख से अधिक आबादी वाले इस शहर के कुछेक लोगों ने एक समय तो पूरे शहर की जान को आफत में डाल दिया। पुलिस और प्रशासन की लाख समझाईश के बाद आखिरकार ये नासमझ लोग मौके से दूर हो गए लेकिन इसके पहले इन्होने इंदौर की छवि धूमिल करने में उन्होंने कोई कसर नही छोड़ी। इन कुछ लोगो की नासमझी ने ने लाखों इंदौरवासियों की मेहनत पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब सोशल मीडिया पर राजवाड़ा और पाटनीपुरा पर एकत्रित हुए लोगों पर जमकर निशाना साधा जा रहा है और ये कहना गलत नहीं होगा कि इनकी इस हरकत ने कोरोना वायरस के खतरे को और बढ़ा दिया है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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