यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों के विरोध में आज मंगलवार को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर में सवर्ण समाज के छात्रों ने प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन श्रीराजपूत करणी सेना के बैनर तले किया गया, जिसमें छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों और भविष्य पर मंडरा रहे संकट को लेकर गंभीर चिंता जताई।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यूजीसी के काले कानून का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया और विश्वविद्यालय के कुलपति को यूजीसी चेयरमैन के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि नए नियमों को तत्काल वापस लिया जाए, क्योंकि यह नियम छात्रों की पढ़ाई, करियर और शैक्षणिक समानता को सीधे प्रभावित करता है।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। आयोजकों के अनुसार इसका उद्देश्य छात्रों में एकता का भाव जागृत करना और धार्मिक, सांस्कृतिक व राष्ट्रीय मूल्यों के साथ इस आंदोलन को जोड़ना रहा।
नया नियम छात्रों पर मानसिक और शैक्षणिक दबाव बढ़ाएगा: श्री करणी सेना
इस अवसर पर श्री करणी सेना प्रमुख अनुराग प्रताप सिंह राघव ने कहा कि यूजीसी का नया नियम सवर्ण समाज सहित कई वर्गों के छात्रों के लिए अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह नियम छात्रों पर मानसिक और शैक्षणिक दबाव बढ़ाएगा तथा उनके भविष्य को अंधकारमय बना सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी समाज के छात्रों के हितों की रक्षा के लिए है।
1 फरवरी को इंदौर बंद की घोषणा
उन्होंने यह भी घोषणा की कि यूजीसी के काले कानून के विरोध में आंदोलन आगे भी चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। आगामी कार्यक्रमों के तहत 1 फरवरी को इंदौर बंद का आह्वान किया गया है, जबकि 2 फरवरी को इंदौर सांसद के निवास का घेराव किया जाएगा। आयोजकों ने सभी छात्र संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों से अपील की है कि वे छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर आगे आकर समर्थन करें और लोकतांत्रिक तरीके से इस आंदोलन को मजबूती प्रदान करें।





