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MP प्रमोशन में आरक्षण: हाईकोर्ट ने नई पॉलिसी पर सरकार से किए सवाल, 3 फरवरी को अगली सुनवाई

Reported by:Sandeep Kumar|Edited by:Gaurav Sharma
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मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण मामले पर हाईकोर्ट में बहस पूरी हो गई है। अब हाईकोर्ट ने नई प्रमोशन पॉलिसी को लेकर राज्य सरकार से एक हफ्ते में जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि नई पॉलिसी में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन कैसे किया गया है।
MP प्रमोशन में आरक्षण: हाईकोर्ट ने नई पॉलिसी पर सरकार से किए सवाल, 3 फरवरी को अगली सुनवाई

जबलपुर: मध्य प्रदेश में कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण का मामला एक बार फिर अहम मोड़ पर आ गया है। जबलपुर हाईकोर्ट में इस मामले पर अजाक्स (अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ) और सपाक्स (सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संस्था) के बीच जिरह पूरी हो गई है। इसके बाद अब अदालत ने राज्य सरकार से नई प्रमोशन पॉलिसी पर जवाब तलब किया है।

हाईकोर्ट ने सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है। इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को तय की गई है। माना जा रहा है कि सरकार का जवाब आने के बाद हाईकोर्ट इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख सकता है, जिसका असर प्रदेश के लाखों कर्मचारियों पर पड़ेगा।

नई पॉलिसी पर हाईकोर्ट के कड़े सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की नई प्रमोशन पॉलिसी को लेकर कई अहम सवाल उठाए। अदालत ने सरकार से स्पष्ट रूप से बताने को कहा है कि इस नई नीति में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस का पालन कहां और कैसे किया गया है।

कोर्ट ने विशेष रूप से ‘आरबी राय’ मामले का जिक्र करते हुए पूछा कि उस फैसले में बताई गई कमियों को इस नई पॉलिसी में कैसे दूर किया गया है। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि पुरानी प्रमोशन पॉलिसी की किन खामियों को सुधारकर यह नई नीति तैयार की गई है। इन सवालों ने सरकार के लिए स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

सपाक्स ने पेश किए ग्रेडेशन के आंकड़े

इससे पहले, बहस के दौरान सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रहे सपाक्स ने कर्मचारियों के ग्रेडेशन से जुड़े आंकड़े हाईकोर्ट के सामने पेश किए। सपाक्स ने अपनी दलील में दावा किया कि कई विभागों में आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों की संख्या पहले से ही काफी अधिक है। इन आंकड़ों के जरिए उन्होंने प्रमोशन में आरक्षण की नीति का विरोध किया। वहीं, अजाक्स ने आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों के अधिकारों की पैरवी की।

सरकार के जवाब पर टिका फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के जवाब और हाईकोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं। 3 फरवरी को होने वाली सुनवाई इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है। यदि सरकार संतोषजनक जवाब दाखिल करती है तो प्रमोशन का रास्ता खुल सकता है, अन्यथा यह मामला और लंबा खिंच सकता है।