RED ZONE इंदौर में अब खुलेगी आटा चक्की, प्रशासन ने दी ये राहत

RED ZONE इंदौर में अब खुलेगी आटा चक्की, प्रशासन ने दी ये राहत

इंदौर/आकाश धोलपुरे

कोरोना से प्रभावित इंदौर भले ही रेड जोन में हो लेकिन धीरे-धीरे प्रशासन अब शहर को उस राह पर ले जा रहा है जहां जीने की राह आसान हो सके। ये ही वजह है कि पहले फलों के विक्रय को लेकर प्रशासन ने इंतजाम किए और अब आटा चक्की शुरू करने को लेकर भी आदेश जारी कर दिया है। जिसका मतलब है अब इंदौर के शहरी क्षेत्र में आटा चक्की शुरू की जा सकेगी।

हालांकि कोरोना संकट को देखते हुए जिला कलेक्टर मनीष सिंह ने कुछ शर्तें भी रखी हैं जिनका पालन कर आटा चक्की खोली जा सकेगी। कलेक्टर के आदेश के मुताबिक आटा चक्की सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक खुली रहेगी और 5 बजते से ही चक्की बन्द करना जरूरी होगी। वही चक्की के संचालक अपनी दुकान पर 2 से ज्यादा कर्मचारी नहीं ले जा सकेंगे। इसके अलावा संचालक और कर्मचारियों को मास्क पहनने व हाथ को सेनेटाइज करना जरूरी होगा। वही ग्राहकों को भी मास्क पहनकर दुकान पर जाना अनिवार्य रहेगा। इसके अलावा एक समय मे चक्की पर संचालक सहित 5 लोग 2 गज की दूरी के साथ सोशल डिस्टेसिंग का पालन करने का नियम भी बनाया गया है। आटा चक्की संचालक को ये कोशिश करने की बात भी कही गई है कि वो ग्राहकों को अलग अलग समय पर दुकान पर बुलाये और उनका काम करे। आम लोगो की सुविधा और जरूरत को ध्यान में रखते हुए कर्फ्यू पास का बंधन नही रखा गया है लेकिन इस बीच यदि पुलिस रोककर पूछताछ करती है तो लोगो को पुलिस के सन्तुष्ट करना होगा कि वो वाकई चक्की के काम से जा रहे हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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