देश की 3 तीसरी निजी ट्रेन इंदौर से वाराणसी के बीच महाशिवरात्रि चलेगी

देश की 3 तीसरी निजी ट्रेन इंदौर से वाराणसी के बीच महाशिवरात्रि चलेगी

इंदौर।
देश की तीसरी निजी ट्रेन इंदौर से वाराणसी के बीच चलेगी । इस ट्रेन की घोषणा रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले दिनो में इंदौर में की थी। इस का नाम महाकाल एक्सप्रेस रखा गया है। जल्द ही देश के 150 प्रमुख रूटों पर चलने वाली निजी ट्रेनों में इंदौर-वाराणसी महाकाल एक्सप्रेस ट्रेन भी शामिल होगी। इस की शुरुवात महाशिवरात्रि होगीं।

यह ट्रेन इंदौर से वाराणसी जाते समया भोपाल के संत हिरदाराम नगर स्टेशन पर भी रुकेगी। इंदौर से वाराणसी जाते समय संत हिरदाराम नगर स्टेशन पर 3 बजकर 5 मिनट पर और वाराणसी से इंदौर जाते समय सुबह 5 बजकर 25 मिनट पर संत हिरदाराम नगर स्टेशन रुकेगी। यह हफ्ते में अभी सिर्फ तीन दिन चलेगी। वाराणसी से पहली हली ट्रेन 20 फरवरी को चलेगी, जो 21 फरवरी को इंदौर पहुंचेगी। यह दो ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ व उज्जैन के महाकाल ज्योतिर्लिंग को जोड़ेगी। हालाकि सप्ताह में कौन-कौन से दिन संत हिरदाराम नगर स्टेशन से ट्रेन मिलेगी, यह अभी तय नहीं हो पाया है।

यात्रियों को ये सुविधा मिलेगी

ट्रेन में यात्रीयों को वाईफाई की सुविधा मिलेगी इसके आलावा ट्रेन में सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे। यात्रियों को पेंट्रीकार में अपनी पसंद का खाना मिल सकेगा। ट्रेन एक घंटा लेट हुई तो 100 रुपए और उससे अधिक लेट हुई तो 250 रुपए मुआवजे के रूप में यात्रीयों को मिल सकते हैं। इसमें ट्रेन में चेयरकार की जगह स्लीपर कोच लगे होंगे।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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