कोरोना को लेकर इंदौर मेडिकल कॉलेज की डीन की गंभीर लापरवाही आई सामने

कोरोना को लेकर इंदौर मेडिकल कॉलेज की डीन की गंभीर लापरवाही आई सामने

इंदौर।आकाश धोलपुरे।

कोरोना के संक्रमण से जूझ रहे इंदौर के मामले में एमजीएम मेडिकल कॉलेज की डीन डा. ज्योति बिंदल की गंभीर लापरवाही सामने आई है। दरअसल भोपाल एम्स में भेजे गए कोरोना संक्रमण के संभावित मरीज़ों के सैंपल में से 17 सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं जिसकी पुष्टि खुद इंदौर के सीएमएचओ डॉ प्रवीण जङिया ने की है। इस खबर के आने के बाद इंदौर में हड़कंप मच गया है लेकिन इसके उलट इंदौर की मेडिकल कॉलेज की डीन डा. ज्योति बिंदल इस पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है और उनका कहना है कि उनके पास एम्स से अभी तक कोई ऐसी सूची नहीं आई जिसके आधार पर वे कह सकें कि 17 मरीज़ पॉजिटिव और मिले हैं।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ज़िला स्वास्थ्य अधिकारी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि अब इंदौर में इन 17 पॉजिटिव मरीज़ों के साथ कुल पॉजिटिव मरीज़ों की संख्या 42 हो गई है तो फिर आखिरी डीन इससे इन्कार क्यों कर रही हैं। डीन इस पूरे मामले में तकनीकी त्रुटि होने की बात भी कर रही है ।अगर डीन की बात को भी सही मान लिया जाए तो तकनीकी त्रुटि का अर्थ है या तो सैंपल लेने में गड़बड़ी हुई या सैंपल की जांच में और आखिर इतनी गंभीर गड़बड़ी किसने की ,यह भी जांच का विषय है और क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी यह भी। व्यवस्थाओं को सुधारने के बजाय गलियों पर पर्दा डालने की कोशिश डीन को भारी पड़ सकती है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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