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इस देश में लाखों रुपए देने के बाद भी नहीं कर रहे लोग ये वाली जॉब, जानिए इसके पीछे क्या है कारण

Written by:Ronak Namdev
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जहां एक ओर भारत में लोग नौकरियां पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया में लाखों में सैलरी देने के बाद भी काम करने वाले नहीं मिल रहे हैं। चलिए जानते हैं यह पूरा मामला क्या है।
इस देश में लाखों रुपए देने के बाद भी नहीं कर रहे लोग ये वाली जॉब, जानिए इसके पीछे क्या है कारण

क्या आपने कभी सोचा है कि किसी देश में लाखों रुपए देने के बाद भी कोई जॉब लेने के लिए राज़ी नहीं हो रहा हो? दरअसल ऑस्ट्रेलिया में ऐसा ही हुआ है इस देश के सिडनी में एक मीट कंपनी में गुर्जर की जॉब के लिए हायरिंग चल रही है जिसके लिए वह 130000 AUD जिसे अगर भारतीय करेंसी में कन्वर्ट किया जाए तो यह 73 लाख रुपए के लगभग है। इतना वेतन देने के बाद भी उन्हें कोई काबिल व्यक्ति काम के लिए नहीं मिल रहा है।

दरअसल कंपनी द्वारा बताया गया कि उन्हें इस पद के लिए 140 आवेदन आए लेकिन सभी के सभी कैंडिडेट विदेशी थे जिसमें से अधिकतर लोग भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों से है। उल्टा करना है कि इनमें से कई लोग ऐसे हैं जी जिन्हें या तो काम ही नहीं आता या फिर इंग्लिश ही अच्छे से नहीं बोल पाते हैं ।

विज्ञापनों पर कंपनी खर्च कर रही है$1100 तक 

इतना ही नहीं, एक कंपनी के मालिक के मुताबिक स्थिति इतनी खराब है कि उन्हें काबिल व्यक्ति खोजने के लिए विज्ञापनों पर 1100 डॉलर हर महीने के हिसाब से खर्च करना पड़ रहे हैं। लेकिन इससे बावजूद भी मनमुताबिक रिजल्ट मिल नहीं पा रहा है। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया में लोग इस तरह के काम को करना पसंद नहीं कर रहे हैं या फिर उनमें स्किल की काफी कमी है। अब आप सोचिए कि अगर ये जॉब भारत में होती तो क्या इतनी सैलरी मिलने के बाद भी योग्य व्यक्ति को ढूंढने में परेशानी आती?

ऑस्ट्रेलिया का माइग्रेशन भी है चुनौती 

दरअसल किसी देश में जाने के लिए या फिर वहां काम करने के लिए उनके माइग्रेशन नियमों का पालन करना जरूरी होता है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के माइग्रेशन कानून काफी सख्त हैं। खास तौर पर जब बात बूचर जैसी स्किल्ड जॉब की होती है और यही नहीं इसके अलावा वीजा के लिए अच्छी इंग्लिश आना भी जरूरी है। एक ऑस्ट्रेलियाई कंपनी के मालिक ने यह बताया कि कई कैंडिडेट ऐसे भी होते हैं कि जो माइग्रेशन के लिए तैयार हो चुके थे लेकिन फिर भी वीजा पाने के लिए जो टेस्ट होते हैं या फिर जो जरूरी नियम होते हैं। उनकी वजह से यह लोग फंस जाते हैं और फिर उन्हें नए कैंडिडेट को ढूंढना पड़ता है।

Ronak Namdev
लेखक के बारे में
मैं रौनक नामदेव, एक लेखक जो अपनी कलम से विचारों को साकार करता है। मुझे लगता है कि शब्दों में वो जादू है जो समाज को बदल सकता है, और यही मेरा मकसद है - सही बात को सही ढंग से लोगों तक पहुँचाना। मैंने अपनी शिक्षा DCA, BCA और MCA मे पुर्ण की है, तो तकनीक मेरा आधार है और लेखन मेरा जुनून हैं । मेरे लिए हर कहानी, हर विचार एक मौका है दुनिया को कुछ नया देने का । View all posts by Ronak Namdev
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