अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच एक नया व्यापारिक विवाद खड़ा होता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर चल रहे विवाद के बीच 8 यूरोपीय देशों पर 10 फीसदी अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की धमकी दी है। इस धमकी के बाद यूरोपीय संघ ने भी सख्त रुख अपनाते हुए जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
यूरोपीय संसद की अंतरराष्ट्रीय व्यापार समिति के अध्यक्ष बर्न्ड लांगे ने यूरोपीय आयोग से इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने ट्रंप के इस कदम को ब्लैकमेल बताते हुए यूरोपीय संघ के विशेष ‘एंटी-कोएरशन इंस्ट्रूमेंट’ (ACI) को लागू करने का आग्रह किया है। यह तंत्र किसी तीसरे देश द्वारा बनाए जा रहे आर्थिक दबाव से निपटने के लिए बनाया गया है।
‘अब बहुत हो गया, जवाब देने का समय’
बर्न्ड लांगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म LinkedIn पर एक पोस्ट में कहा कि अब चुप रहने का समय नहीं है। उन्होंने लिखा, “अब बहुत हो गया। समय आ गया है कि एंटी-कोएरशन इंस्ट्रूमेंट को लागू किया जाए और यूरोपीय संघ की ओर से एक साफ और ठोस जवाब दिया जाए।” उन्होंने यूरोपीय आयोग से इस प्रक्रिया को बिना किसी देरी के शुरू करने की अपील की है।
लांगे ने ट्रंप की धमकी को अविश्वसनीय बताते हुए कहा कि यह टैरिफ को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का नया और खतरनाक तरीका है।
“मैं कल्पना नहीं कर सकता कि हम सामान्य रूप से काम जारी रख सकते हैं, और मुझे लगता है कि हम अपना आगे का काम रोक देंगे।” — बर्न्ड लांगे, अध्यक्ष, यूरोपीय संसद अंतरराष्ट्रीय व्यापार समिति
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका का यह कदम यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौतों का उल्लंघन है। लांगे के अनुसार, अगले सप्ताह यूरोपीय संसद में इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक समूहों के साथ चर्चा की जाएगी।
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद ग्रीनलैंड को लेकर है, जो डेनमार्क साम्राज्य के तहत एक स्व-शासित क्षेत्र है। डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड में रुचि दिखाते रहे हैं और अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने इसे खरीदने की इच्छा भी जताई थी। हाल के दिनों में ट्रंप इसे अपने नियंत्रण में लेने के लिए सैन्य इस्तेमाल समेत कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिससे यह संकट और गहरा गया है।
इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप ने शनिवार को घोषणा की कि 1 फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सभी सामानों पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि ये देश ग्रीनलैंड विवाद पर अमेरिका का साथ नहीं दे रहे हैं।





