अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा – ‘राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई से मिलने को तैयार’, कूटनीतिक समाधान पर जोर

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई से सीधी बातचीत के लिए तैयार हैं। रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पहले कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा - 'राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई से मिलने को तैयार', कूटनीतिक समाधान पर जोर

मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बढ़ने के बावजूद वाशिंगटन ने ईरान के साथ बातचीत का दरवाजा खुला रखा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में दिए बयान में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई से मिलने के लिए तैयार हैं, बशर्ते वे खुद ऐसी इच्छा जताएं।

रुबियो ने अपने बयान में साफ किया कि विरोधी नेताओं से बातचीत करना कोई कमजोरी या झुकना नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रंप का मानना है कि गंभीर विवादों को सुलझाने का सबसे प्रभावी तरीका सीधा संवाद ही है। इससे यह नहीं समझा जाना चाहिए कि अमेरिका ईरान की नीतियों से सहमत है।

सैन्य तैयारी के साथ कूटनीति

अमेरिका ने हाल के हफ्तों में मध्य पूर्व क्षेत्र में अपनी नौसैनिक और सैन्य उपस्थिति को काफी बढ़ाया है। रुबियो ने इसे एहतियाती कदम बताते हुए कहा कि यह ईरान की ओर से संभावित हमलों को रोकने के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि अतीत में ईरान पर अमेरिकी हितों को निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं, इसलिए सतर्कता जरूरी है।

हालांकि सैन्य तैयारियों के बीच भी रुबियो ने दोहराया कि ट्रंप प्रशासन समझौते के जरिए समस्या का समाधान निकालने को प्राथमिकता देता है। उन्होंने संकेत दिया कि जल्द ही वार्ता शुरू हो सकती है, जिसमें अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकोफ और जारेड कुश्नर भी हिस्सा ले सकते हैं।

परमाणु हथियारों पर सख्त रुख

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका का रुख बेहद सख्त बना हुआ है। रुबियो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। उनके अनुसार, ऐसा होने से न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा।

“राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि दुश्मन से बात करना कमजोरी नहीं है। अगर आयतुल्लाह खामेनेई मिलना चाहते हैं, तो ट्रंप जरूर मिलेंगे।” — मार्को रुबियो, अमेरिकी विदेश मंत्री

सहयोगी देशों के चीन दौरे पर प्रतिक्रिया

रुबियो ने अमेरिकी सहयोगी देशों के नेताओं द्वारा चीन की यात्रा को लेकर भी अपनी राय रखी। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के हालिया चीन दौरे को उन्होंने सामान्य कूटनीतिक गतिविधि करार दिया।

उन्होंने कहा कि बड़ी शक्तियों के बीच संवाद बनाए रखना जरूरी है ताकि अनावश्यक टकराव से बचा जा सके। रुबियो ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप पहले भी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर चुके हैं और भविष्य में बीजिंग की यात्रा भी संभव है।

अमेरिका की यह रणनीति दर्शाती है कि वाशिंगटन मध्य पूर्व में सैन्य ताकत के प्रदर्शन के साथ-साथ कूटनीतिक विकल्पों को भी जिंदा रखना चाहता है। ट्रंप प्रशासन का यह दृष्टिकोण पिछले कुछ वर्षों की अमेरिकी नीति से अलग नजर आता है, जहां सीधे संवाद को प्राथमिकता दी जा रही है।

Banshika Sharma
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कंटेंट राइटर

मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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