शिवराज के मंत्रियों पर नजर रखेगी कांग्रेस की ‘शैडो कैबिनेट’, BJP ने साधा निशाना

शिवराज के मंत्रियों पर नजर रखेगी कांग्रेस की ‘शैडो कैबिनेट’, BJP ने साधा निशाना

जबलपुर| संदीप कुमार| शिवराज मंत्रिमंडल पर नजर रखने कांग्रेस शैडो केबिनेट बनाने जा रही है| कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी और पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने बयान देते हुए कहा है कि कांग्रेस शिवराज मंत्रिमंडल पर अपनी नजर बनाए रखेगी ताकि भ्रष्टाचार ना हो सके ।

शैडो कैबिनेट बनाने की पीछे कांग्रेस की मंशा है कि बीते 4 महीने से पेंडिंग फाइलों पर होने वाले फैसलों पर नजर रखी जाए वही मंत्रिमंडल का कामकाज कैसा चल रहा है इस पर भी उनकी निगाहें रहेंगी। कांग्रेस के इस बड़े फैसले के बाद भाजपा भी कांग्रेस पर हमलावर हुई है|

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद राकेश सिंह ने कहा है कि इससे ज्यादा हास्यास्पद बात और कुछ नहीं हो सकती । अगर कमलनाथ की शैडो केबिनेट सरकार में रहते हुए कैबिनेट मंत्रियों पर नजर रखती तो शायद उनकी सरकार गिरने की नौबत नहीं आती| कमलनाथ सरकार में भ्रष्टाचार ,तबादला उद्योग और अराजकता का ठिकाना था और सिर्फ यही सब पनपता था। कांग्रेस शैडो कैबिनेट जरूर बना रही है लेकिन उससे कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है । शैडो कैबिनेट बनाने का कांग्रेस का यह हथकंडा सिर्फ खबरों में बने रहने का है ।

राकेश सिंह ने राजस्थान के सियासी ड्रामे पर भी बयान दिया| मीडिया से बातचीत में उन्होने कहा कि कांग्रेस के भीतर लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं बची है| कांग्रेस मे किस नेता का क्या जनाधार है इसकी पार्टी के अंदर कोई अहमियत नहीं होती यही वजह है कि यह जो असंतोष है वह बाहर निकल कर आ रहा है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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