जिस बाघ की खाल पर बैठकर पूजा किया करती थीं डिप्टी कमिश्नर की मां, वही बनी उनके जेल जाने की वजह, पढ़ें पूरा मामला

EOW को जगदीश सरवटे के विरुद्ध अनुपातहीन सम्पति अर्जित करने की शिकायत मिली थी जिसकी जाँच के बाद उसने मामला दर्ज किया और 22 जुलाई को उनके अलग अलग ठिकानों पर छापे मारे जहाँ करोड़ों रुपये की अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा हुआ है।  
Jabalpur tiger skin

मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है, EOW की छापेमारी के दौरान आदिम जाति कल्याण विभाग के डिप्टी कमिश्नर जगदीश सरवटे घर में मिली बाघ की खाल की जांच के बाद वन विभाग ने सरवटे की बुजुर्ग माँ सावित्री सरवटे को जेल भेज दिया है, उनके विरुद्ध वन्य प्राणी अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

अनुपातहीन संपत्ति के मामले में आदिम जाति कल्याण विभाग के डिप्टी कमिश्नर जगदीश सरवटे के घर हुई EOW की छापेमारी में करोड़ों रुपये की अनुपातहीन सम्पति मिलने के दौरान टीम उस समय चौंक गई जब सर्चिंग के दौरान वहां बाघ की खाल मिली, बाघ की खाल मिलते ही EOW के अफसरों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी जिसके बाद वन विभाग के अफसरों ने उसकी जांच शुरू की।

बाघ की खाल पर बैठकर पूजा करती थीं माँ, वन विभाग ने जेल भेजा  

वन विभाग की टीम ने जगदीश सरवटे से बाघ की खाल के सम्बन्ध में पूछताछ की तो उन्होंने गोलमोल जवाब दिए लेकिन उनकी माँ सावित्री सरवटे से पूछताछ में बताया कि ये खाल उन्हें उनके ससुर ने 30 साल पहले दी थी वे इस  खाल के ऊपर बैठकर पूजा करती हैं, पूछताछ के बाद वन विभाग ने नियम विरुद्ध खाल रखने के आरोप में वन्य प्राणी अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज कर सावित्री सरवटे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

करीब 6 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति मिली छापों में 

उल्लेखनीय है कि EOW की टीम ने पिछले दो दिनों में जगदीश सरवटे के कई ठिकानों पर छापे मारे, जबलपुर ईओडब्ल्यू की टीम ने सरवटे के जबलपुर स्थित शंकर शाह नगर रामपुर का शासकीय आवास, भोपाल स्थित बाग मुगलिया का मकान, आधारताल जबलपुर स्थित पैतृक मकान में सर्चिंग के लिए 3 टीमों एक साथ छापे मारे, सागर स्थित शासकीय आवास की सर्चिंग सागर EOW की टीम ने की है। अभी तक डिप्टी कमिश्नर जगदीश सरवटे पर सर्चिंग में  कुल 5 करोड़ 89 लाख 95 हजार 624 रुपये की अनुपातहीन संपत्ति उजागर हुई है, जाँच अभी जारी है।

जबलपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट 

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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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