हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को लगाई फटकार

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जबलपुर। हाईकोर्ट ने सांवेर जेल के निर्माण कार्य के सिलसिले में टिप्पणी करते हुए मध्यप्रदेश सरकार को फटकार लगाई है। यहां निर्माण कार्य बंद पड़ा है और इसीपर टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार जनता का पैसा बर्बाद कर रही है। बता दें कि हाईकोर्ट द्वारा ये टिप्पणी सांवेर जेल में बंद हो चुके काम को लेकर एक जनहित याचिका पर की गई है।

इस निर्माण कार्य में अब तक 17 करोड़ 91 लाक रूपये खर्च किये जा चुके हैं और उसके बाद यकायक प्रोजेक्ट रोक दिया गया। इतनी राशि खर्च करने के बाद भी जो निर्माण कार्य किया गया वो अब जर्ज स्थिति में है और इसे गंभीर मामला मानते हुए हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह से दो हफ्ते के भीतर शपथ पत्र दायर कर विस्तार से जानकारी मांगी है। ऐसा न करने पर उन्हें स्वयं कोर्ट में हाज़िरी लगानी पड़ेगी।

दो पेज के आदेश में कोर्ट ने कहा है कि यह बहुत गंभीर है कि करोड़ों खर्च करने के बाद सरकार ने अचानक जेल प्रोजेक्ट बंद कर दिया। यह भी पता नहीं कि आखिर यह फैसला क्यों लिया गया था। प्रमुख सचिव कैबिनेट के प्रस्ताव स्वीकृत करने, एमओयू साइन होने, निर्माण होने और अचानक काम बंद करने के फैसले के संबंध में विस्तृत जवाब शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत करें। दो सप्ताह में शपथ पत्र नहीं आया तो प्रमुख सचिव को खुद कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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