लगाइए सीएम हेल्पलाइन, आबकारी वाले तो रिश्तेदार हैं, शराब की ओवर प्राइसिंग पर ग्राहक से बोला दुकानदार

ज्यादा कीमत पर शराब बेच रहे दुकानदार की बात से स्पष्ट है कि आबकारी विभाग का इन्हें संरक्षण प्राप्त है, इसलिए ये ग्राहकों के साथ खुले आम ठगी कर रहे हैं। 
Overpricing in Jabalpur liquor shop

शराब की दुकानों पर ओवर प्राइसिंग यानि ग्राहक से निर्धारित कीमत से अधिक पैसा वसूलना गैर क़ानूनी है ये दुकानदार जानते हैं लेकिन जबलपुर में ओवर चार्जिंग का खेल खुले आम जारी है, दुकानदार बेख़ौफ़ होकर ग्राहक से एमआरपी से अधिक पैसा वसूल रहे हैं, इतना ही नहीं वे इसकी वजह भी खुले आम बता रहे हैं जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

आबकारी विभाग के अफसरों और शराब दुकान संचालकों का गठजोड़ कैसे खुले आम मध्य प्रदेश में ग्राहकों के साथ ठगी कर रहा है इसका उदाहरण जबलपुर की एक दुकान का वायरल वीडियो है,  इस वीडियो में जब ग्राहक ज्यादा पैसे मांगे जाने का विरोध करता है और इसे गलत बताता है तो दुकान पर काम करने वाला लड़का पहले तो सीएम हेल्प लाइन में शिकायत करने की नसीहत देता है फिर मालिक के पास ले जाता है और मालिक जो कहता है वो आंखे खोल देता है।

ग्राहकों से ठगी, खुलेआम कीमत से अधिक वसूली  

दरअसल एक युवक शराब खरीदने के लिए गढ़ा स्थित गंगा सागर शराब दुकान पर पहुंचा उसने एक पाव (पौआ) मांगा, बोतल पर कीमत 170/- रुपये लिखी थी लेकिन दुकान पर काम करने वाले लड़के ने 190 रुपये लिए जब उसने इसका कारण पूछा तो पहले लड़के और फिर दुकान संचालक की बात सुनकर उसके होश उड़ गए, उसने इस पूरी बात का चुपचाप वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

“सब रिश्तेदार हैं हमारे, वो कभी कुछ नहीं कहते”

ग्राहक ने जब ओवर चार्जिंग का विरोध किया तो दुकान पर काम करने वाला लड़का कहने लगा सीएम हेल्पलाइन है न शिकायत कर दो…  उसके बाद जब ग्राहक ने और सवाल किये तो उसने दुकान संचालक से मिलवा दिया, दुकान संचालक बोला आबकारी विभाग में सब रिश्तेदार हैं हमारे, वो कभी कुछ नहीं कहते, इतना ही नहीं रिश्वत देने की भी बात स्वीकार करते हुए वो कहता है कि घोड़ा घांस से दोस्ती करेगा तो खायेगा क्या? हम सबको पैसा देते हैं।

जबलपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट  

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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