जवारे और कलश यात्रा पर दिखा कोरोना वायरस का असर

जवारे और कलश यात्रा पर दिखा कोरोना वायरस का असर

जबलपुर| संदीप कुमार| कोरोना वायरस का असर भगवान राम के त्यौहार रामनवमी में भी देखने को मिल रहा है। आमतौर पर रामनवमी के पर्व पर सैकड़ों लोग जवारे और कलश लेकर सड़कों पर देखने को मिलते थे पर इस वर्ष कोरोना वायरस के खौफ से लोगों ने ना ही अपने घरों में जवारे बोए और ना ही कलश यात्रा निकाली चूँकि जिला प्रशासन की भी इसको लेकर सख्ती थी यही वजह थी कि था कि कम लोग ही आज रामनवमी के त्यौहार में घरों से बाहर निकले।

कलश यात्रा और जवारे के दौरान दिखा सोशल डिस्टेंस…….
जबलपुर के गंगासागर स्थित मडिया जी मंदिर में हर साल सैकड़ों लोग जवारे और कलश लेकर आते थे पर इस वर्ष कोरोना वायरस और जिला प्रशासन की सख्ती भगवान के इस त्योहार में भारी पड़ गई।यही कारण था कि महज चंद लोग ही गंगासागर माड़िया जी तालाब में जवारे और कलश लेकर निकले। कलश लेकर आई लोगों में सोशल डिस्टेंस का पालन किया साथ ही सभी लोगों ने मास्क भी लगाए।

कोरोना वायरस खत्म करने के लिए भगवान से की गई प्रार्थना……

गंगासागर स्थित माड़िया जी के मंदिर में कलश और जवारे लेकर आए लोगों ने भगवान से प्रार्थना की है कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से जबलपुर सहित प्रदेश और देशवासियों की रक्षा करें और जल्द ही यह वायरस भारत से खत्म हो जाए ताकि लोग आम दिनों की तरह अपना जीवन व्यतीत कर सकें। हम आपको बता दें कि कोरोना वायरस के चलते जबलपुर जिला प्रशासन ने 31 मार्च से ही पूरे शहर में लॉक डाउन करके रखा हुआ है जिसका असर रामनवमी पर्व पर भी देखने को मिल रहा है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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