‘करीना कपूर खान प्रेगनेंसी बाइबल’ किताब को लेकर अभिनेत्री ने जबलपुर हाईकोर्ट के नोटिस का जवाब दिया

इस किताब के शीर्षक में बाइबल शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसके बाद अदालत ने अभिनेत्री को नोटिस जारी किया था, जिसका जवाब उनकी तरफ़ से दे दिया गया है। इसमें कहा गया है कि उनकी मंशा किसी की धार्मिक भावनाएँ आहत करने की नहीं थी।
‘करीना कपूर खान प्रेगनेंसी बाइबल’ किताब को लेकर अभिनेत्री ने जबलपुर हाईकोर्ट के नोटिस का जवाब दिया

Kareena Kapoor Khan’s Pregnancy Bible : अभिनेत्री करीना कपूर खान ने उनकी किताब ‘करीना कपूर खान प्रेगनेंसी बाइबल’ को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट के नोटिस का जवाब दे दिया है। उन्होंने किताब की बिक्री पर रोक की मांग वाली याचिका पर आपत्ति जताते हुए किसी की धार्मिक भावनाएं आहत करने की मंशा ना होने की दलील दी है।

दरअसल करीना कपूर ने अपने प्रेगनेंसी के दौरान के अनुभवों को साझा करने के लिए ये किताब लिखी है। इसका शीर्षक है ‘करीना कपूर खान प्रेगनेंसी बाइबल’। लेकिन ये शीर्षक ही उनके लिए मुश्किल का सबब बन गया। इसके शीर्षक पर आपत्ति जताते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। इसमें क्रिश्चयन समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की बात कहते हुए अभिनेत्री पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी।

किताब के शीर्षक को लेकर आपत्ति

जबलपुर के एडवोकेट किस्टोफर एंथोनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में उन्होंने कहा कि करीना कपूर की किताब का शीर्षक ईसाई धर्म के अनुयायियों के पवित्र धार्मिक ग्रंथ ‘बाइबिल’ से लिया गया है और ये बेहद आपत्तिजनक है। ये किताब जगरनाट बुक्स द्वारा प्रकाशित हुई है। मामले पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद जस्टिस जीएस आहलूवालिया की एकलपीठ ने करीना कपूर खान, अदिति शाह भीमजियानी, अमेजन इंडिया, जगरनाट बुक्स व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

करीना कपूर ने अदालत में जवाब पेश किया

अब करीना कपूर खान की तरफ से हाईकोर्ट में अपना जवाब पेश कर दिया है। उनके वकील दिव्य कृष्ण बिलैया एवं निखिल भट्ट द्वारा जवाब पेश किया गया और याचिका पर आपत्ति दर्ज करवाई गई है। इस जवाब में कहा है कि उनकी मंशा किसी की धार्मिक भावनाएं आहत करने की नहीं थी। बता दें कि इस विवाद के बाद सोशल मीडिया पर भी करीना के समर्थन और विरोध में आवाज़ें उठने लगी थी। कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बताया, जबकि अन्य ने धार्मिक भावनाओं के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया। फ़िलहाल इस मामले में कोर्ट की कार्यवाही जारी है और अब दो हफ़्ते बाद अगली सुनवाई होगी।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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