कोरोना के नाम पर लूट की छूट,इस जिले में अब प्राइवेट अस्पतालों को इलाज का जिम्मा

कोरोना के नाम पर लूट की छूट,इस जिले में अब प्राइवेट अस्पतालों को इलाज का जिम्मा

जबलपुर/संदीप कुमार

जबलपुर में निजी अस्पतालों को प्रशासन ने कोरोना के नाम पर लूट करने की छूट दे दी है।कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या पर काबू पाने निजी अस्पताल का अधिग्रहण करने के लिये कलेक्टर ने निजी अस्पताल संचालकों की एक बैठक बुलाई थी। लेकिन मामला इसके विपरीत हो गया और नर्सिंग होम एसोसिएशन के दबाव में यह तय कर दिया गया कि अब आर्थिक रूप से सक्षम कोरोना मरीज निजी अस्पताल में पैसा खर्च करके अपना इलाज कराएंगे और गरीब मरीजों को शासन की सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

अब इसमें कोई संदेह नहीं कि इस निर्णय के बाद सभी निजी अस्पताल अपने अपने हिसाब से इलाज के नाम पर फीस वसूलेंगें और नाम दिया जाएगा सुविधाओं का। नर्सिंग होम एसोसिएशन ने कहा है कि जो अस्पताल वाई फाई, टीवी आदि की सुविधाएं देंगे वो ज्यादा फीस वसूलेंगे। इस पूरे मामले में कलेक्टर ने गोल मोल जवाब देते हुए कहा कि नर्सिंग होम एसोसिएशन सब तय करके बताएगा।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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