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MP हाईकोर्ट ने हेल्थ कमिश्नर, मेडिकल एजुकेशन के डायरेक्टर को जारी किया नोटिस, मांगा जवाब

Written by:Amit Sengar
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एक तो डॉक्टर्स को एमबीबीएस के बाद पोस्टिंग देने में डेढ साल तक की देर की जा रही है और दूसरी तरफ रुरल सर्विस बॉन्ड का उल्लंघन होने पर 25 लाख रुपयों की पेनाल्टी लगाई जा रही है।
MP हाईकोर्ट ने हेल्थ कमिश्नर, मेडिकल एजुकेशन के डायरेक्टर को जारी किया नोटिस, मांगा जवाब

High Court

MP News : जबलपुर हाईकोर्ट ने डॉक्टर्स से जुड़े हुए एक अहम मामले में प्रदेश के हेल्थ कमिश्नर और डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन को नोटिस जारी किया है। गुरुवार को हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों से पूछा कि मध्यप्रदेश में एमबीबीएस की पढाई के बाद डॉक्टर्स को पोस्टिंग देने में डेढ़ साल की देर क्यों की जा रही है, साथ ही कोर्ट ने ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने के सर्विस बॉन्ड का उल्लंघन होने पर 25 लाख रुपयों की भारी भरकम पेनाल्टी लगाए जाने पर भी जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट में ये याचिका भोपाल के डॉक्टर अंश पंड्या ने दायर की थी। याचिक में बताया गया कि एक तो डॉक्टर्स को एमबीबीएस के बाद पोस्टिंग देने में डेढ साल तक की देर की जा रही है और दूसरी तरफ रुरल सर्विस बॉन्ड का उल्लंघन होने पर 25 लाख रुपयों की पेनाल्टी लगाई जा रही है। इससे एमबीबीएस डॉक्टर्स के पोस्ट ग्रेजुएशन में करीब सात साल की देर होने और उनके ऐकेडमिक कैरियर में पिछड़ने का भी हवाला दिया गया है।

25 लाख की पेनाल्टी को कम करने के दिए सुझाव

याचिका में कहा गया कि संसद में चर्चा के बाद इंडियन मेडिकल काउंसिल ने भी 25 लाख की पेनाल्टी को कम करने के सुझाव दिए थे लेकिन मध्यप्रदेश में सरकार ने इस पर कोई विचार नहीं किया। हाईकोर्ट जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए प्रदेश के डीएमई और हैल्थ डारेक्टर को नोटिस जारी कर मामले पर जवाब मांगा है।

जबलपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट

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लेखक के बारे में
मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।” View all posts by Amit Sengar
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