कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा की बढ़ी मुश्किल, हाई कोर्ट ने चुनाव याचिका रद्द करने से किया इंकार

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाए कि जबलपुर के आईसीआईसीआई बैंक से करीब 22 से 25 लाख रुपए का लोन लिया था, जो कि बढ़कर आज 65 से 70 लाख हो गया है। बैंक से लिया गया लोन कहां गया, आज तक कुछ भी पता नहीं।
Jabalpur HC

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रीवा के सेमरिया सीट से 2023 में विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने कांग्रेस के अभय मिश्रा की मुश्किलें बढ़ गई है। भाजपा प्रत्याशी केपी त्रिपाठी ने चुनाव में मिली जीत को चुनौती देते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने चुनावी नामांकन के दौरान आपराधिक रिकार्ड और लोन लेने संबंधित जानकारी छिपाई थी। सुनवाई के दौरान सुरक्षित रखे फैसले पर हाई कोर्ट ने 4 सप्ताह में विधायक अभय मिश्रा से जवाब मांगा है। मामले पर अगली सुनवाई अब 18 अप्रैल को तय की गई है।

याचिकाकर्ता केपी त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया कि 2023 में हुए विधानसभा चुनाव के नामांकन में कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने मुकदमों और बैंक से लिए गए लोन से संबंधित जानकारी छिपाई थी। कोर्ट को बताया गया कि 2002-2003 में उन्होंने डम्पर के लिए लोन लिया था, जिसमें डम्पर के रजिस्ट्रेशन से संबंधित दस्तावेज लगाए जाने चाहिए थे, इसके अलावा उन्होंने अपना पेन कार्ड भी नहीं लगाया था।

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाए कि जबलपुर के आईसीआईसीआई बैंक से करीब 22 से 25 लाख रुपए का लोन लिया था, जो कि बढ़कर आज 65 से 70 लाख हो गया है। बैंक से लिया गया लोन कहां गया, आज तक कुछ भी पता नहीं।  केपी त्रिपाठी का कहना था कि लोन से संबंधित दस्तावेज भी इन्होंने गायब करवा लिए थे, जो कि निकलवाकर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

आपराधिक मुक़दमे छिपाने का आरोप 

याचिका में कोर्ट को यह भी बताया गया कि कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के खिलाफ 307, अपहरण के कई मुकदमे है,जो विधायक बनने के बाद सेटल किये गए। जस्टिस विनय सराफ की कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि चुनाव याचिका को रद्द करने की मांग को ठुकराते हुए कहा कि आरोप सुनवाई योग्य है,ट्रायल जरुरी है।

अभय मिश्रा की विधायकी पर ख़तरा 

बता दे कि कांग्रेस के अभय मिश्रा भाजपा के केपी त्रिपाठी से 637 वोट से चुनाव जीते थे। इस मामले में 18 अप्रैल से सुनवाई होगी। इसके बाद अब नियमित सुनवाई शुरु होगी। जिसमें गवाहों और सबूतों के आधार पर फैसला लिया जाएगा। यादि आरोप साबित होते है, तो यह मामला अभय मिश्रा की विधायकी के लिए खतरा बन सकता है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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