मप्र हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर-DEO को भेजा नोटिस, पूछा- पदस्थापना क्यों नहीं दी?

Madhya Pradesh highcourt

जबलपुर, संदीप कुमार।MP High Court. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की एकलपीठ ने आदेश का पालन ना करने पर स्कूल शिक्षा विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर राम कुमार स्वर्णकार और जिला शिक्षा अधिकारी जबलपुर घनश्याम सोनी को नोटिस जारी किया है।हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग से पूछा है कि पूर्व आदेश के बावजूद एक दृष्टिबाधित दिव्यांग शिक्षिका को उसके जिले में पदस्थापना क्यों नहीं दी।अगली सुनवाई 27 को निर्धारित की गई है।

यह भी पढ़े MP: 3 दिन बाद फिर बदलेगा मौसम, इन जिलों में बूंदाबांदी के आसार, लू का अलर्ट, मानसून पर बड़ी अपडेट

दरअसल, पूरा मामला दृष्टिबाधित शिक्षकों को गृह ग्राम में पोस्टिंग ना देने का है। यह याचिका दृष्टिबाधित दिव्यांग महिला शिक्षक की ओर से प्रस्तुत की गई है। याचिकाकर्ता महिला शिक्षक जबलपुर के कुंडम हायर सेकेंडरी स्कूल में अंग्रेजी विषय पढ़ातीं हैं, उनकी ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पक्ष रखते हुए दलील दी कि याचिकाकर्ता पूर्णत: दृष्टिबाधित दिव्यांग है और उनका गृह जिला बालाघाट है, ऐसे में उन्हें वहां पोस्टिंग दी जाएं। इसके लिए शिक्षिका ने विभाग को गृह जिले में पदस्थापना के लिए तीन बार आवेदन दिया था कि बालाघाट में तीन स्कूलों में अंग्रेजी शिक्षक के खाली पद पर उसे भेज दो, बावजूद इसके कोई फैसला नहीं लिया गया।

यह भी पढ़े.. हजारों पेंशनरों के लिए बड़ी अपडेट, जल्द पूरा करें ये काम, वरना रुक सकती है जून-जुलाई की पेंशन

इस मामले में हाई कोर्ट ने पूर्व में उक्त अधिकारियों को निर्णय लेने कहा था। महिला शिक्षक को गृह जिला बालाघाट में पदस्थ नहीं किया गया। आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई।इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने इस मामले में पूर्व में विभाग को उक्त अधिकारियों को निर्णय लेने कहा था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि कल्याणकारी राज्य में अधिकारियों का यह दायित्व है कि वह लोगों की समस्या को समझें और उनका निराकरण करें, फिर भी आदेश का पालन नहीं किया गया, इसके बाद आज कोर्ट ने दोनों को नोटिस जारी कर 4 हफ्तों में जवाब मांगा है।

Pooja Khodani
लेखक के बारे में
Pooja Khodani

12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
Follow Us :GoogleNews