कोरोना वायरस: मुफ़्ती ए आजम ने मुस्लिम भाइयों से की अपील, जुमे की नमाज़ घरों में ही करे अता

कोरोना वायरस: मुफ़्ती ए आजम ने मुस्लिम भाइयों से की अपील, जुमे की नमाज़ घरों में ही करे अता

जबलपुर।संदीप कुमार।

कोरोना वायरस के चलते अब कल होने वाली मुस्लिम समुदाय की अदा होने वाली जुमा की नमाज़ पर भी बदलाव किया गया है।मध्यप्रदेश के मुफ़्ती ए आजम मौलाना हामिद अहमद सिद्ध की ने प्रदेश भर के मुस्लिम भाइयों को निर्देश दिए है कि ईदगाह में 10 से ज्यादा लोग नमाज़ अता करने न आए।

मौलाना हामिद अहमद सिद्ध की का मुस्लिम समुदाय के लोगो के लिए संदेश

संदेश में लिखा हुआ है कि आज सारी दुनिया कोरोना वायरस की महामारी से परेशान है और इससे फैलने वाली बीमारी ने सारी दुनिया को जकड़ लिया है। इस महामारी से फैलने के कारण शासन प्रशासन हर एहतियाती कदम भी उठा रहा है और इससे किस तरह बचा जा सकता है। उन तमाम तरीकों को समझाया भी लगातार जा रहा है।ऐसे में एतिहाद के तौर पर हुक़ूमत भी हमसे मुताबिक कर रही है की मस्जिदों में नमाज बाजवा अता  करने पर रोक एहतियाती तौर पर लगाई जाए। मस्जिदों को आबाद रखना मुसलमानों का फर्ज़ है पर मौजूदा हालात को देखते हुए लोग अपने घरों में ही नमाज़ पढे तो इसमें कोई हर्ज भी नहीं है।

मुस्लिम भाइयों से मुफ़्ती ए आजम ने की अपील
कल जुमे की नमाज अदा होने वाली है जिसको लेकर मौलाना हामिद अहमद सिद्ध की ने सभी से अपील की है कि ईदगाह में 10 से ज्यादा लोग ना जाए और जो जाते भी है तो वो मास्क लगाकर ही नमाज़ अता करे। बाकी मुस्लिम भाई अपने अपने घरों पर ही नमाज़ पढ़ सकते है।

कोरोना वायरस से लड़ने के लिए पाँचो वक्त अजाने दी जाए। चूँकि ये एक दूसरे से लगने वाली बीमारी है जो हुजूम और भीड़ में एक दूसरे को लग सकती है। लिहाजा एहतियात लाज़मी हैं। जिसमें कोई शरई रुकावट नहीं। मस्जिद बंद ना की जाएं और जो नमाज की जमात है उसे भी कायम रखें। मुल्क में इस महामारी के ना फैलने की और अमन कायम रखने की दुआएँ भी सभी मुस्लिम भाई करें।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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