राशन दुकानों के लिए नए निर्देश, अनाज देने के बाद बायोमेट्रिक को करना होगा सेनेटाइज

राशन दुकानों के लिए नए निर्देश, अनाज देने के बाद बायोमेट्रिक को करना होगा सेनेटाइज

जबलपुर| कोरोना वायरस संक्रमण के बीच शासकीय उचित मूल्य की दुकानों को राज्य सरकार से नए निर्देश प्राप्त हुए।सहकारी उपभोक्ताओ की दूकानों से इस लॉक डाउन मे हर पात्रधारियो को राशन मिले इसके लिए सरकार ने अपने पुराने नियमो को शिथल कर नए नियम सहकारी उपभोक्ता भंडार में लागू कर दिए है।

उपभोक्ताओं भंडार संचालको के लिए ये है नए नियम……
कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए राज्य सरकार ने निर्देश दिए थे कि राशन के लिए बायो मेट्रिक मशीन में सहकारी भंडार संचालक के अंगूठे के निशान लगेंगे पर अब सरकार ने नए नियमो के तहत निर्देश दिए है कि बायो मेट्रिक मशीन में उपभोक्ताओं को ही अपने अंगूठे के निशाना लगाना होगा तभी राशन उपलब्ध होगा।इसके अलावा राशन दूकान संचालक को हर उपभोक्ताओ को अनाज देने के बाद बायो मेट्रिक मशीन को सेनेट्राइज कर साफ करना होगा।

सहकारी उपभोक्ता भंडार संचालको की बात पहुँचाई गई है राज्य सरकार तक…..
सहकारी उपभोक्ता भंडार संचालको की मांग है कि उन्हें भी वीवीपी किट उपलब्ध कराई जाए क्योंकि उनकी दूकान में भी कई तरह के लोग आते है ऐसे में उन्हें भी संक्रमण का डर है इसके अलावा राज्य सरकार उपभोक्ता भण्डार में रहने वाले सेल्समैन और कर्मचारियों का बीमा कराए।

जिला फ़ूड कंट्रोलर ने नए नियमो से कलेक्टर से कराया अवगत…..
जिला उपभोक्ता अधिकारी ने राशन दुकान में उपभोक्ता संबंधित नए नियमो की जानकारी से कलेक्टर भरत यादव को भी अवगत करवाया है जिसको लेकर मुख्य सचिव से कलेक्टर जल्द ही बात करेंगे।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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