कन्या विवाह राशि कम होने पर शुरू हुई राजनीति, पूर्व मंत्री ने शिवराज सरकार पर कसा तंज

कन्या विवाह राशि कम होने पर शुरू हुई राजनीति, पूर्व मंत्री ने शिवराज सरकार पर कसा तंज

जबलपुर, संदीप कुमार
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कन्या विवाह और निकाह योजना में 51 हजार रुपयों की राशि देने से शिवराज सरकार के इंकार के बाद सियासत तेज हो गई है| प्रदेश के पूर्व सामाजिक न्याय मंत्री लखन घनघोरिया ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर जमकर निशाना साधा है और आरोप लगाया है कि वो बदले की राजनीति कर रहे हैं|

लखन घनघोरिया ने कहा कि सीएम शिवराज, कमलनाथ सरकार की जनहितैषी योजनाओं को बंद कर रहे हैं जिसका ख़ामियाजा उन्हें आने वाले उपचुनावों में उठाना पड़ेगा| कमनलाथ सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री रहे लखन घनघोरिया ने कुछ आंकड़े भी पेश करते हुए शिवराज सरकार के मंत्रियों पर झूठ फैलाने के आरोप लगाए हैं| लखन घनघोरिया ने दावा किया है कि बीती शिवराज सरकार के आखिरी साल में कुल 41 हजार सामूहिक विवाह हुए थे जबकि कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में 75 हजार 464 शादियां हुईं जिसमें 44 हजार 781 शादियों में कमलनाथ सरकार ने 228 करोड़ रुपयों की राशि जारी कर दी थी|

पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया का कहना है कि बाकी बचे 30 हजार 683 शादियों में भी कमलनाथ सरकार कन्याओं के बैंक खातों में 156 करोड़ का भुगतान करने की तैयारी में थी लेकिन इससे पहले प्रदेश की सरकार गिरा दी गई| लखन घनघोरिया ने कहा कि शिवराज सरकार को या तो आंकड़ों की जानकारी नहीं है या वो जानबूझकर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की जरुरत कम बताकर इसमें 51 हजार रुपए देने की योजना बंद कर रही है| लखन घनघोरिया ने कहा कि ऐसा करना गरीबों के साथ अन्याय करना होगा लिहाजा मुख्यमंत्री अगर वाकई सेवाभाव रखते हैं तो कमलनाथ सरकार की जनहितैषी योजनाओं को बंद ना करें|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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