शिक्षक भर्ती 2018 के अनारक्षित वर्ग के 13% अभ्यर्थियों की सूची आज तक जारी नहीं, 6 साल से लड़ रहे न्याय की लड़ाई

न्यायालय और विभाग से 2018 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी यह मांग करते हैं कि 13% अनारक्षित वर्ग की अभ्यर्थियों की सूची भी सार्वजनिक की जाए। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जो भ्रम की स्थिति बनी हुई है वह खत्म हो।
mp high court

Jabalpur News : शिक्षक भर्ती 2018 के चयनित अभ्यर्थी पिचेल 6 साल से अपने हक़ के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, उन्होंने न्याय के मंदिर में गुहार लगाई है लेकिन  धीमी सरकारी रफ़्तार के चलते अब तक उन्हें आशा की कोई किरण दिखाई नहीं दे रही, हालाँकि उन्हें उम्मीद है कि न्याय जरुर मिलेगा इस बीच स्कूल शिक्षा विभाग और अपने मनमानीपूर्ण रवैये से उनकी परेशानी को बढ़ा रहे हैं।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच में मुख्य न्यायाधीश के सामने ओबीसी आरक्षण याचिकाओं की सुनवाई चल रही है अभ्यर्थियों के मुताबिक कल 6 दिसंबर को याचिका क्रमांक 18105 तथा इसके साथ जुड़ी अन्य याचिकाओं की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील द्वारा दलील दी गई कि सिर्फ और सिर्फ ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थी होल्ड है और अनारक्षित वर्ग का एक भी अभ्यर्थी होल्ड नहीं है। परंतु किसी ने भी यह सवाल नहीं उठाया कि ऐसा क्यों हुआ कि अनारक्षित वर्ग का कोई अभ्यार्थी होल्ड नहीं है?

अनारक्षित वर्ग का कोई भी अभ्यर्थी होल्ड नहीं

अभ्यर्थियों ने कहा, अनारक्षित वर्ग का कोई भी अभ्यर्थी होल्ड नहीं है क्योंकि विभागीय अधिकारियों ने भेदभावपूर्ण रवैया अपनाते हुए अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की 13% पदों पर आज तक कोई भी सूची जारी नहीं की। आज 6 साल बाद भी विभाग के अधिकारियों ने कोई भी ऐसी सूची नहीं दी है जिसमें 13 प्रतिशत अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का जिक्र हो।

29 सितम्बर के विज्ञापन के आधार पर बहुत को मिल चुका लाभ

आरक्षण सम्बन्धी ट्रांसफर याचिका जब पुनः हाई कोर्ट में आई तब ओबीसी तथा सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों में एक खुशी दिखाई दी कि जल्द ही कोई ना कोई फैसला होगा परंतु हाई कोर्ट जबलपुर में जिन ओबीसी होल्ड अभ्यर्थियों का मसला उठाया जा रहा है वास्तव में उनमें से अधिकांश अभ्यर्थियों का चयन 29/09/2022 के विज्ञापन में जारी पदों पर हो चुका है। पूर्व में होल्ड अधिकांश अभ्यर्थियों के नियुक्ति पत्र 30/03/23 जारी हो चुके हैं।

6 साल से कर रहे हैं न्याय का इंतजार

धीमी तथा सुस्त सरकारी प्रक्रियाओं के कारण पिछले 6 वर्षों में भी न्यायालय द्वारा आरक्षण के मुद्दे का निराकरण नहीं किया जा पा रहा है। जिससे युवाओं का भविष्य दाँव पर लगा है, अभ्यर्थियों का कहना है कि विभागों ने समस्या से बचने के लिए 13-87 का नियम लागू करके नियुक्तियां प्रदान कर दी जिसमें 13% से अनारक्षित वर्ग के योग्य अभ्यर्थियों जैसे ओबीसी वर्ग, एसटी और एससी वर्ग, सामान्य वर्ग के युवाओं की लिस्ट बननी थी और दूसरी 13% पर ओबीसी वर्ग की, परंतु स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसा ना करते हुए सिर्फ 13% से ओबीसी वर्ग के ही अभ्यर्थियों की लिस्ट सार्वजनिक की एक और लिस्ट जो 13% से अनारक्षित वर्ग की जारी होनी थी वह आज तक जारी नहीं की गई ।

शिक्षा विभाग ने 13% अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की सूची सार्वजनिक ही नहीं की

अभ्यर्थियों का कहना है कि यह कहीं भी नहीं लिखा है कि अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थी भी होल्ड है जो सभी वर्गों के हैं और नियुक्ति पाने की योग्यता रखते हैं क्योंकि यह 13% पद अभी कोर्ट के निर्णय के अधीन है इन्हें किसी एक वर्ग के लिए होल्ड दिखाना गलत है, फिर भी भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग ने तो 13% अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की सूची सार्वजनिक ही नहीं की जिसके कारण आज भी अभ्यर्थी संशय की स्थिति में है 13% की लिस्ट में आ रहे हैं या नहीं।

न्यायालय और सरकार से अभ्यर्थियों की अपील

न्यायालय और विभाग से 2018 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी यह मांग करते हैं कि 13% अनारक्षित वर्ग की अभ्यर्थियों की सूची भी सार्वजनिक की जाए। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जो भ्रम की स्थिति बनी हुई है वह खत्म हो और समय आने पर जिस वर्ग के फेवर में निर्णय आए उन्हें नियुक्ति प्रदान की जाए जिससे किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी की स्थिति उत्पन्न ना हो।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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