इंसानियत की मिसाल, मुस्लिमों ने दिया हिन्दू की अर्थी को कंधा, रीति रिवाजों से कराया अंतिम संस्कार

इंसानियत की मिसाल, मुस्लिमों ने दिया हिन्दू की अर्थी को कंधा, रीति रिवाजों से कराया अंतिम संस्कार

जबलपुर|संदीप कुमार| jabalpur news कोरोना वायरस (Corona Virus) कोरोना संकट काल के बीच जबलपुर में साम्प्रदयिक सद्भाव की तस्वीर सामने आई है| जब पूरा शहर ब्लॉक डाउन है लोग अपने अपने घरो के अंदर है तो ऐसे समय पर हनुमानताल निवासी अरुण कुमार गर्ग का अंतिम संस्कार मुस्लिमों ने किया। गरीब नवाज कमेटी के सदस्य इनायत अली और उनके सहयोगियों ने अरुण कुमार गर्ग की अर्थी को ना सिर्फ कांधा दिया बल्कि मुक्तिधाम तक पहुंचा कर उनकी बेटे से मुखाग्नि भी दिलवाई।

गरीब नवाज कमेटी के इनायत अली ने बताया कि हनुमानताल निवासी अरुण कुमार गर्ग का अचानक ही दोपहर को 12 बजे घर पर निधन हो गया है। घर पर मृतक की पत्नी और उसके एक मासूम बेटे के अलावा कोई भी नहीं था।लॉक डाउन के चलते ना ही जिला प्रशासन उनकी मदद कर रहा है और ना ही रिश्तेदार। लिहाजा गरीब नवाज कमेटी के सदस्य एक बार फिर इस पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आए।जैसे ही इनायत अली को इस पूरे घटनाक्रम की सूचना मिली तो वह अपने साथियों के साथ हनुमानताल जैन मंदिर के पास पहुंचे और अरुण कुमार गर्ग के शव को लेकर मुक्तिधाम आए। जहां पर की पूरी हिंदी रीति रिवाज के साथ मृतक का अंतिम संस्कार किया गया।इतना ही नही शाम होने के चलते इनायत अली और उनके साथियों के मुक्तिधाम पर ही अपना रोजा खोला।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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