कोर्ट परिसर में हो रही घटनाओं पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार को 31 मार्च तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

रजिस्ट्रार की रिपोर्ट में बताया गया कि 29 जिला न्यायालयों में चहारदीवारी ही नहीं। 27 तहसील कोर्ट में बाउंड्री वॉल बेहद छोटी। 5 जिला कोर्ट परिसरों में पुलिस चौकी। 5 जिलों में जज और स्टाफ की सुरक्षा व्यवस्था नहीं है।
Jabalpur HC

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मध्य प्रदेश की अदालतों में लगातार जजों की सुरक्षा में चूक और कोर्ट परिसर में हो रही घटनाओं को हाईकोर्ट ने  गंभीरता से लेते हुए सरकार को कड़े शब्दों में निर्देश देते हुए कहा कि आगामी 31 मार्च तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। दरअसल 2016 में हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई की थी, जो कि लगातार जारी है। सरकार ने एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश की थी, लेकिन उसमें कई कमियां बताते हुए आपत्ति दर्ज की।

आज हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से अधिवक्ता बीएन मिश्रा, जजेस एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिल्डियाल और राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अनुभव जैन मौजूद रहे। वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिल्डियाल ने कोर्ट को बताया कि पहले हाई कोर्ट में एक शख्स भ्रूण लेकर अंदर चला गया, उसके बाद फिर जिला कोर्ट में धमाका हुआ। कही जज पर दीवार गिर गई।

हाई कोर्ट ने पूछा- सरकार इस मुद्दे पर गंभीर क्यों नहीं? 

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मामले पर सुनवाई करते हुए
प्रदेश की अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार को कड़े शब्दों में जवाब देने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने हाल की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा “कोर्ट की दीवार गिरने से जज घायल हो रहे हैं, कोर्ट परिसर में बम फूट रहे हैं… आखिर सरकार इस मुद्दे पर गंभीर क्यों नहीं है?” कोर्ट ने 31 मार्च तक अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करे।

रजिस्ट्रार की रिपोर्ट में अदालतों की सुरक्षा में कई खामियां 

हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार नरेश एम सिंह द्वारा दाखिल रिपोर्ट में प्रदेश की अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए है। बताया गया कि 29 जिला न्यायालयों में चहारदीवारी ही नहीं। 27 तहसील कोर्ट में बाउंड्री वॉल बेहद छोटी। 5 जिला कोर्ट परिसरों में पुलिस चौकी। 5 जिलों में जज और स्टाफ की सुरक्षा व्यवस्था नहीं है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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