पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) के नाम से फर्जी पत्र वायरल होने के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने उठाया है। कांग्रेस पार्टी आईटी सेल के तीन कार्यकर्ता- निखिल, बिलाल और इनाम की गिरफ्तारी, जमानत और पुलिस कार्रवाई पर उठे सवालों को लेकर डीआईजी जयपुर और डीसीपी क्राइम भोपाल को निर्देश जारी किए गए हैं। उनसे ब्यौरा मांगा गया है।
राजस्थान पुलिस में तीनों कार्यकर्ताओं को चीफ जस्टिस के सामने पेश किया था। जिसके बाद तीनों आरोपियों को जमानत भी मिल गई है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गिरफ्तारी की तारीख 22 अप्रैल बताई, जबकि उन्हें पहले ही भोपाल से हिरासत में लिया गया था।
इस मामले में पुलिस ने बयान दिया कि 20 अप्रैल को तीनों कार्यकर्ता खुद ही उनके साथ पहुंचे थे। जांच के बाद गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी की गई। लेकिन इस बयान को आरोपियों ने झूठा बताया है।
आरोपित ने क्या कहा?
अधिवक्ता एचएस छाबा ने दलील दी कि 20 अप्रैल की सुबह लगभग 3:00 बजे साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, भोपाल में पुलिस द्वारा आईटी कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था और उन्हें दो दिनों तक किसी भी मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया। अब गिरफ्तारी की तारीख को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 2 दिन बाद गिरफ्तारी दिखाने पर कई सवाल उठ रहे हैं। मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
12 मई को अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने सीजेएम को तीनों कार्यकर्ताओं का बयान दर्ज करने का निर्देश जारी किया है। जयपुर के डीआईजी और भोपाल के डीसीपी क्राइम के पूरे मामले में शपथ पत्र के माध्यम से जवाब मांगा है। अधिकारियों को सच्चाई स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई की तारीख 12 मई 2026 तक की गई है, जिसमें संबंधित अधिकारियों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। वहीं जयपुर पुलिस का कहना है कि मुचलका जमा करने के बाद तीनों कार्यकर्ता जमानत पर रिहा होंगे।






