मोटरसाइकिल की टेल लाइट पर बैठकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, 111 किलोमीटर चलाई रॉयल इनफील्ड

मोटरसाइकिल की टेल लाइट पर बैठकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, 111 किलोमीटर चलाई रॉयल इनफील्ड

जबलपुर, संदीप कुमार| भारतीय सेना (Indian Army) के कोर ऑफ सिग्नल के द्वारा बाइक पर स्टंट (Bike Stunt) करने का एक और विश्व कीर्तिमान (World Record) स्थापित किया गया है| बुधवार की सुबह कोर ऑफ सिग्नल की डेयरडेविल्स टीम (DareDevils) ने बाइक की टेल लाइट पर बैठकर सबसे लंबी दूरी तय करने का प्रदर्शन शुरू किया है|

लांस नायक मिशाल गजानन बबनराव ने यह स्टंट किया हैं| सुबह सेना के वरिष्ठ अधिकारी और हाई कोर्ट के जज की उपस्थिति में लांस नायक विशाल गजानन बाबूराव ने बाइक की टेल लाइट पर बैठकर बाइक चलाना प्रारंभ किया| बाइक के हैंडल को पकड़े बिना सिर्फ टेल लाइट पर बैठकर उन्होंने बाइक को कंट्रोल किया और मैदान के चक्कर लगाने शुरू कर दिए|

उन्होंने 2 घंटे 27 मिनट और 56 सेकंड तक बाइक चलाई और 111 किलोमीटर की दूरी तय करके नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है| इस दौरान सेना के वरिष्ठ अधिकारी हाई कोर्ट के जज इस और अन्य गणमान्य लोगों ने इस विश्व रिकॉर्ड को दर्ज किया और सर्टिफिकेट जारी किया है| सेना जल्द ही इस विश्व रिकॉर्ड को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज करने के लिए भेजेगी| इसके पूर्व विश्व में किसी ने भी बाइक की टेल लाइट के पीछे बैठकर इस तरह का रिकॉर्ड नहीं बनाया है इसलिए यह अपनी तरह का अनूठा विश्व रिकॉर्ड होगा.| डेयरडेविल्स इसके पहले भी बाइक पर स्टंट के कई विश्व कीर्तिमान बना चुके हैं.|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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