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केंद्रीय बजट पर भड़कीं झारखंड की मंत्री दीपिका पांडेय, बोलीं- ‘केंद्र का सौतेला व्यवहार, मध्यम वर्ग निराश’

Written by:Gaurav Sharma
Published:
झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्रीय बजट की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे आम जनता, मध्यम वर्ग और गरीबों के लिए निराशाजनक बताते हुए केंद्र पर झारखंड की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है।
केंद्रीय बजट पर भड़कीं झारखंड की मंत्री दीपिका पांडेय, बोलीं- ‘केंद्र का सौतेला व्यवहार, मध्यम वर्ग निराश’

रांची: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट पर झारखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। झारखंड सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इस बजट को जनता के साथ छलावा करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और इस बजट में भी राज्य के हितों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।

एक बयान में मंत्री दीपिका पांडेय ने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का मायाजाल है, जिसमें आम आदमी के लिए कोई ठोस राहत नहीं है। उन्होंने इसे मध्यम वर्ग और गरीब तबके के लिए एक बड़ी निराशा बताया।

झारखंड की अनदेखी और बकाया राशि का मुद्दा

मंत्री ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि झारखंड के साथ भेदभाव कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य को विकास कार्यों के लिए किसी विशेष पैकेज की उम्मीद थी, लेकिन बजट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया।

“यह बजट लोगों को लुभाने वाला जरूर दिखता है, लेकिन हकीकत में इसमें न तो मध्यम वर्ग के लिए कोई ठोस राहत है और न ही गरीबों के लिए कोई विशेष प्रावधान किया गया है।”- दीपिका पांडेय सिंह, मंत्री, झारखंड सरकार

दीपिका पांडेय ने यह भी कहा कि झारखंड सरकार ने कई बार केंद्र के समक्ष अपनी बकाया राशि के भुगतान की मांग रखी है। उनके अनुसार, अगर यह राशि समय पर मिल जाती, तो राज्य में ग्रामीण विकास, सड़क, आवास और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को और तेजी से लागू किया जा सकता था।

‘मध्यम वर्ग और गरीबों को सिर्फ निराशा मिली’

बजट के प्रावधानों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि महंगाई से जूझ रहे मध्यम वर्ग को टैक्स में राहत की बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन उन्हें भी निराशा ही हाथ लगी। उन्होंने कहा कि बजट में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया जिससे आम परिवार की जेब पर पड़ रहा बोझ कम हो सके।

गरीबों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार भले ही बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर गरीबों के जीवन में बदलाव लाने वाले प्रावधान इस बजट से गायब हैं। उन्होंने रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बजट को कमजोर बताया।

केंद्र पर तानाशाही का आरोप

मंत्री दीपिका पांडेय ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश को तानाशाही तरीके से चलाया जा रहा है, जहां राज्यों की आवाज को अनसुना किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ है और केंद्र सरकार एकतरफा फैसले ले रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड सरकार अपने हक और अधिकारों के लिए आवाज उठाती रहेगी और केंद्र को सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। इस बयान के बाद केंद्र और राज्य के बीच बजट को लेकर तकरार बढ़ने की पूरी संभावना है।