राम मंदिर चढ़ावा विवाद के मामले पर सियासत तेज हो गई है। विपक्ष लगातार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भाजपा सरकार पर कई सवाल खड़े कर रहा है। राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब देश भर में एक विवादित मुद्दा बन गया है। इस बीच, कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मामले में तीखा हमला बोला है।
कर्नाटक मंत्री प्रियांक खरगे ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि तो प्रधानमंत्री इस पर ‘मन की बात’ कब करेंगे? प्राण प्रतिष्ठा प्रधानमंत्री ने की, उद्घाटन प्रधानमंत्री ने किया। अब प्रधानमंत्री की आवाज कहां है?
ये भी पढ़ें
इतना ही नहीं, प्रियांक खरगे ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, योगी आदित्यनाथ की आवाज अब कहां है? मैंने कल उनका बयान सुना, जिसमें वे कह रहे थे कि राम भक्तों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि आखिर भावनाओं के साथ खिलवाड़ किसने किया? खरगे ने आगे सवाल उठाते हुए कहा, क्या इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी या किसी अन्य विपक्षी दल का कोई नेता शामिल था? नहीं। इसमें आपके ही लोग शामिल थे।
आस्था की रक्षा करने में पूरी तरह नाकाम रही भाजपा: खरगे
प्रियांक खरगे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि आप लोगों की आस्था की रक्षा करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। मैं पिछले दो सप्ताह से यही बात कह रहा हूं। ये वही लोग हैं जिन्होंने भगवान राम के नाम पर लूट-खसोट की है। उन्होंने आगे कहा, यही लोग धर्म के नाम पर राजनीति करते हैं। ऐसे लोगों से किसी सकारात्मक या अच्छे काम की उम्मीद नहीं की जा सकती।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद में अब तक कार्रवाई
अब सवाल यह है कि राम मंदिर चढ़ावा विवाद में अब तक क्या कार्रवाई हुई है? राज्य सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद FIR की बड़ी कार्रवाई हुई है। सरकार के निर्देश पर 8 लोगों पर अब तक मामला दर्ज किया गया है। वहीं श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है।
बता दें कि राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब धार्मिक, कानूनी और राजनीतिक तीनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और जांच एजेंसियों की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि मामला केवल कर्मचारियों तक सीमित रहेगा या इसकी जिम्मेदारी बड़े अधिकारियों तक भी तय की जाएगी।
