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जनसुनवाई में दिखा अनोखा नजारा : हाथ में संविधान, जमीन पर लेटकर मांगा इंसाफ, प्रशासन बोला- जांच के बाद होगा निर्णय

Written by:Amit Sengar
Last Updated:
पीड़ित का आरोप है कि उसकी पुश्तैनी जमीन पर दबंगों ने अवैध कब्जा कर लिया है उस पर वह मंदिर का निर्माण फिर शुरू करा रहे हैं। जबकि तहसीलदार ने विवादित जमीन पर निर्माण कार्य को रोकने का आदेश (स्टे) जरूर दिया था, मगर 15 दिन तक ही निर्माण रुका रहा।
जनसुनवाई में दिखा अनोखा नजारा : हाथ में संविधान, जमीन पर लेटकर मांगा इंसाफ, प्रशासन बोला- जांच के बाद होगा निर्णय

Khandwa News : मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जनसुनवाई के दौरान एक अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। जावर थाना क्षेत्र के सहेजला गांव के श्याम कहार नामक युवक ने अपने बीमार पिता रमेश कहार को जमीन पर लेटा दिया और हाथ में संविधान लेकर न्याय की गुहार लगाई। युवक का आरोप है कि उसकी पुश्तैनी जमीन पर दबंगों ने अवैध कब्जा कर लिया है और वहां मंदिर का निर्माण करा रहे हैं।

पीड़ित सालभर से लगा रहा न्याय की गुहार

श्याम कहार ने बताया कि वह पिछले एक साल से अपनी समस्या लेकर जनसुनवाई में आ रहा है, लेकिन आज तक उसकी सुनवाई नहीं हुई। 13 अगस्त को भी उसने जनसुनवाई में लोट लगाकर प्रदर्शन किया था, तब अधिकारियों ने 7 से 10 दिनों में जमीन का सीमांकन कराने का आश्वासन दिया था। लेकिन, आज तक सीमांकन नहीं हुआ।

श्याम ने बताया कि तहसीलदार ने विवादित जमीन पर निर्माण कार्य को रोकने का आदेश (स्टे) जरूर दिया था, जिससे 15 दिन तक निर्माण रुका रहा। लेकिन अब फिर से मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है।

कानूनी प्रक्रिया के बाद होगा समाधान

इस मामले पर एडीएम केके बडोले ने कहा कि श्याम कहार ने साल 1972 की रजिस्ट्री प्रस्तुत की है, लेकिन परिवार ने अभी तक जमीन का नामांतरण नहीं कराया है। अगर नामांतरण समय पर हो जाता, तो यह विवाद खड़ा नहीं होता। अब रिकॉर्ड को सही करने की प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने बताया कि मामले की जांच चल रही है। सभी पक्षों को सुनने के बाद समस्या का समाधान किया जाएगा। साथ ही, युवक को समझाया गया है कि इस तरह के विरोध प्रदर्शन से बचें। “प्रदर्शन अपनी जगह है, लेकिन कानून अपना काम करेगा,” एडीएम ने कहा।

जनसुनवाई में आई प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

इस घटना ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन कब तक इस मामले में न्याय दिलाने का काम पूरा करता है।

खंडवा से सुशील विधाणी की रिपोर्ट

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लेखक के बारे में
मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।” View all posts by Amit Sengar
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