नगर निगम की लापरवाही के चलते रोड पर जल भराव से दुकानदार समेत राहगीर परेशान

नगर निगम की लापरवाही के चलते रोड पर जल भराव से दुकानदार समेत राहगीर परेशान

खंडवा।सुशील विधानी।

शहर का अंडर ग्राउंड नाला ब्लाक होने से बिन मौसम बरसात का नज़ारा शहरवासियों को देखने को मिला जहां गंदा पानी शहर के मुख्य मार्गो से होता हुआ लक्ष्मी नारायण मंदिर पार्वती बाई धर्मशाला ट्रस्ट तक पहुंच गया। शहर में नालों की सफाई पर लाखों रुपए हर वर्ष नगर निगम खर्च करता है, लेकिन नतीजा शहर वासियों के सामने हैं जहां शहर वासियों को बदबूदार गंदे पानी के बीच में से निकलना पढ़ रहा है। नालों की सफाई नहीं होने के कारण यह स्पष्ट देखा जा सकता है कि नगर निगम के अफसर कितनी भी दम भल्ले नालों की साफ सफाई व्यवस्था पर लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

मार्ग में सड़क पर पानी एकाएक भर जाने से आवागमन बाधित हो गया है। और जो लोग उस मार्ग से जा रहे थे उनको परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। शहर के बीचोंबीच का नाला जाम होने के बाद नाली का पानी सड़कों पर आ गया जिससे उससे निकलने वाली बदबू से आस-पास के रहवासी परेशान होते रहे। नाली की सफाई न होंने से नालियों का पानी नाली से ओव्हर फ्लो होकर सड़कों पर मलबा के साथ बहने लगा इससे असहनीय बदबू ने लोगों को परेशान कर दिया।

हाल ही में हुई थोड़ी देर की बारिश ने निगम की पोल खोल दी। नाले-नालियां चोक हो गए। सड़कों पर गंदा पानी बह निकला। हाल में ही बारिश के बाद शहर की असल तस्वीर सामने आई जिसने निगम के स्वच्छता के दावों की पोल तो खोली ही, साथ ही शहर के लोगों को किस प्रकार साफ सफाई हो रही है यह निगम के अफसरों ने आईना दिखाया। नाले-नालियों से बहता गंदा पानी, यहां-वहां फैला कचरा और बदबू मारती गंदगी निगम अफसरों की कार्यप्रणाली और गंभीरता को बताने के लिए पर्याप्त है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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