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महिला बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक ले रही थी रिश्वत, लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथ पकड़ा

Written by:Atul Saxena
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आंगनवाड़ी कार्यकर्ता किरन वाड़िबा ने बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पद पर कार्यरत है और उसकी नियुक्ति एक बदले पर्यवेक्षक श्रीमती संतोष कोचले ने 50 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की है।
महिला बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक ले रही थी रिश्वत, लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथ पकड़ा

Lokayukta Police Action

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर राज्य में भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है, इसी क्रम में आज एक महिला शासकीय सेवक रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ी गई है, लोकायुक्त पुलिस इंदौर की टीम ने महिला कर्मचारी एक विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज कर जाँच में ले लिया है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद लोकायुक्त डीजी योगेश देशमुख लगातार विभागीय अधिकारियों को पैनी नजर रखने के निर्देश देते रहते हैं ताकि कोई रिश्वतखोर बच नहीं पाए, विभाग का स्टाफ भी शिकायत मिलने के बाद तत्काल सत्यापन करता है और घूसखोर को रंगे हाथ पकड़ लेता है।

लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय इंदौर से मिली जानकारी के अनुसार खंडवा जिले  की ग्राम पलास्पुर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता किरन वाड़िबाने एक शिकायती आवेदन दिया था जिसमें महिला बाल विकास विभाग खंडवा सेक्टर -लखनपुर बंदी की पर्यवेक्षक श्रीमती संतोष कोचले पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाये थे।

नियुक्ति के बदले 50000/- रुपये की रिश्वत मांगी  

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता किरन वाड़िबा ने बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पद पर कार्यरत है और उसकी नियुक्ति एक बदले पर्यवेक्षक श्रीमती संतोष कोचले ने 50 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की है, शिकायत मिलने पर एसपी लोकायुक्त इंदौर राजेश सहाय के निर्देश पर इसका सत्यापन कराया गया।

रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ आई पर्यवेक्षक  

सत्यापन में रिश्वत लेने की बात सही साबित हुई और आज 4000/- रुपये देने की बात तय हुई, तत्काल ट्रैप दल गठित किया गया और खंडवा रवाना हुआ, टीम ने जाल बिछाते हुए आरोपी पर्यवेक्षक श्रीमती संतोष कोचले को ग्राम पंचायत रोशनी में 4000/- रिश्वत राशि लेते रंगे हाथ पकड़ लिया।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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