क्यों हर साल 1 अप्रैल को ही मनाते है April Fools’ Day? जानें इसकी मजेदार वजह

April Fool Day: हर साल लोग अप्रैल फूल्स डे 1 अप्रैल को मज़ेदार प्रैंक और झूठे किस्सों से एक-दूसरे को बेवकूफ बनाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अप्रैल फूल्स डे की शुरुआत कब और क्यों हुई? जानिए इस मज़ेदार दिन का रोचक इतिहास और इसके पीछे छिपी दिलचस्प कहानी।
April Fool Day

अगर आप किसी कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं, तो आपको पता ही होगा कि जनरल नॉलेज कितनी अहम भूमिका निभाता है। ज़्यादातर परीक्षाओं में GK के सवाल पूछे जाते हैं, जिससे कि यह पता लगाया जा सके कि कैंडिडेट को हर विषय में कितनी समझ है। कई बार इंटरव्यू में भी GK के सवाल पूछे जाते हैं जिससे कि यह पता लगाया जा सके कि कैंडिडेट की सोचने और समझने की क्षमता कितनी तेज़ है।

हालाँकि, आज हम किसी परीक्षा से जुड़ी हुई बातें नहीं कर रहे हैं बल्कि आज हम 1अप्रैल की बात कर रहे हैं। जी हाँ, वही 1 अप्रैल जिसे अप्रैल फूल के नाम से जाना जाता है। क्या आपने कभी इस बात पर ग़ौर किया है कि अप्रैल का महीना तो 30 दिन का होता है लेकिन अप्रैल फ़ुल डे एक ही तारीख़ को क्यों मनाया जाता है।

1 अप्रैल को April Fool Day क्यों मनाया जाता है?

अप्रैल फूल्स डे, एक ऐसा दिन होता है जब हम एक दूसरे लोगों से छोटे-छोटे मज़ाक मस्ती करते हैं। यानी हम दूसरे लोगों को उल्लू बनाने की कोशिश करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन को मनाने की शुरुआत कब और कैसे हुई? इसके पीछे कोई गहरी वजह है या इसे ऐसे ही मनाया जाता है? अगर आपके मन में ये सवाल आते हैं तो आपको इस आर्टिकल को ज़रूर पढ़ना चाहिए। चलिए जानते हैं इस ख़ास दिन के बारे में।

April Fool Day मनाना कैसे शुरू हुआ?

सदियों से अप्रैल फूल बनाने की परंपरा चली आ रही है और इसे मनाने के पीछे कई तरह की कहानियां भी जुड़ी हुई है। जिसमें से यह एक कहानी काफ़ी प्रचलित है, बताया जाता है 16वीं शताब्दी तक फ़्रान्स में जूलियन कैलेंडर का इस्तेमाल किया जाता था, जिसमें नया साल मार्च के अंत में यानी अप्रैल की शुरुआत में मनाया जाता था। लेकिन 1563 में ट्रेंट काउंसिल ने नए कैलेंडर को अपनाने का फ़ैसला किया और 1582 में फ़्रांस ने ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू कर दिया, जिससे नए साल की शुरुआत एक जनवरी से होने लगी।

अब हुआ कुछ ऐसा कि उस समय संचार के साधन इतने ज़्यादा तेज़ नहीं थे, जिस वजह से कई लोगों को इस बदलाव की जानकारी ही नहीं मिली। वे लोग उन लोगों का मज़ाक बनाने लगे जो पुराने कैलेंडर को फ़ॉलो करते हैं, तब से एक अप्रैल को मज़ाक उड़ाने की परंपरा चली आयी और एक अप्रैल को अप्रैल फूल नाम घोषित किया। देखते देखते यह पूरी दुनिया में फैल गया और अप्रैल फूल्स सब दूर मशहूर हो गया।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey →
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