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भारत के अनोखा गांव, जो कहलाता है मिनी इजरायल, सर्दियों में हो जाता है और भी खूबसूरत!

Written by:Sanjucta Pandit
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भारत का यह गांव मिनी इजरायल कहलाता है। यहां का नजारा काफी अगल और शानदार है। लोग यहां कई बार बस भी जाते हैं। जानें विस्तार से यहां...
भारत के अनोखा गांव, जो कहलाता है मिनी इजरायल, सर्दियों में हो जाता है और भी खूबसूरत!

भारत की पहचान गांव से होती है, यहां के लोग अक्सर खेती-बाड़ी, पशुपालन, मत्स्य पालन इत्यादि पर निर्भर रहते हैं। मिट्टी के घरों में रहने वाले सभी लोग एक-दूसरे से मिलजुल कर गांव की हर एक परंपरा को निभाते हैं। इन सभी के अलग-अलग नाम भी रखे जाते हैं। हालांकि समय के साथ गांव के रहन-सहन में भी काफी ज्यादा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले यहां दीपक जलाकर रात के समय महिलाएं अपने घरों को रोशन किया करती थीं। वहीं, अब लगभग सभी गांव में बिजली कनेक्शन पहुंच चुका है। महिलाएं एक-दूसरे से मिलजुल कर काम में हाथ बंटाती हैं, बच्चे मिट्टी से जुड़े होते हैं, अर्थात वे खेत-खलिहान में खेल कर बड़े होते हैं। पहले गांव में अलग ही रौनक देखने को मिलती थी। हालांकि, अब समय के साथ बहुत कुछ परिवर्तित हो चुका है, लेकिन अब भी लोग सदियों पुरानी चली आ रही रीति-रिवाज को नहीं भूले हैं।

इससे पहले हम आपको भारत के विभिन्न गांव से रूबरू करवा चुके हैं। इन सभी का अपना अलग महत्व और खासियत रहा है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताएंगे, भारत का यह गांव मिनी इजरायल के नाम से मशहूर है। वैसे भी इन दिनों विलेज टूरिज्म का चलन तेजी से बढ़ रहा है। लोग यहां पहले की लाइफ काफी करीब से देखते हैं।

धर्मकोट

दरअसल, हिमाचल प्रदेश की वादियों में एक ऐसा गांव है, जो जितना खूबसूरत है उतना ही अनोखा भी है। इस गांव का नाम धर्मकोट है। यह मिनी इजरायल के नाम से पूरी दुनिया में जाना जाता है। धर्मकोट आने वाले सैलानी इतने मोहित हो जाते हैं कि कई तो यहीं बस जाते हैं। किराए पर घर लेकर महीनों तक यह जगह उनकी नई दुनिया बन जाती है। मैक्लोडगंज से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर बसा यह गांव बेहद खूबसूरत है। ऊंचे देवदार के पेड़, चारों तरफ पहाड़ों की हरियाली और शांत वातावरण यहां आने वाला हर शख्स खुद को किसी दूसरी दुनिया में पाता है।

क्यों कहा जाता है मिनी इजरायल?

धर्मकोट की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां इजरायली पर्यटक बड़ी संख्या में आते हैं। ज्यादातर सैलानी कई महीनों तक यहीं रहना पसंद करते हैं। इसी कारणवश धर्मकोट को “मिनी इजरायल” कहा जाने लगा। यहां की गलियों में घूमते हुए आपको हिब्रू भाषा में लिखे बोर्ड मिल जाएंगे। रेस्टोरेंट और कैफे में इजरायली खाना परोसा जाता है और कई दुकानों पर इजरायली संगीत गूंजता रहता है।

मौमस

धर्मकोट की एक और खूबी इसका मौसम है। गर्मियों में जब बाकी शहरों में पसीना छुड़ाने वाली गर्मी पड़ती है, तब यहां का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं होता। धर्मशाला में जहां पारा 32 डिग्री तक पहुंच जाता है, वहीं धर्मकोट में हल्की ठंडक बनी रहती है। ऐसे में यह जगह गर्मियों में एक परफेक्ट रिलैक्सेशन स्पॉट बन जाती है। सर्दियों में तो यहां का नजारा और भी जादुई हो जाता है। बर्फ से ढकी छतें, देवदार के पेड़ों पर जमी बर्फ और दूर तक फैली सफेदी इस गांव को किसी फिल्मी नजारा मिलती देती है।

आध्यात्मिक केंद्र

इसे आध्यात्मिक केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। यहां देश-विदेश से लोग ध्यान, योग और मेडिटेशन करने आते हैं। कई विदेशी लोग यहां महीनों तक रहकर योग और भारतीय अध्यात्म का अभ्यास करते हैं। गांव के बीचोंबीच बने छोटे-छोटे कैफे और मेडिटेशन सेंटर है। हां आपको हिमाचली और तिब्बती खाने की झलक आसानी से मिल जाएगी। थुकपा, मोमोस, हिमाचली देसी स्नैक्स, काफी और हर्बल टी मिलता है। इसके अलावा, हिमाचली स्वेटर और जैकेट, तिब्बती हैंडिक्राफ्ट, रंग-बिरंगे स्कार्फ और शॉल खरीदें।

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Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit
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