Recipe: सावन के सोमवार को बनाएं स्वादिष्ट कच्चे केले की कचौड़ी, जानें सरल रेसिपी

Recipe: कच्चे केले की कचौड़ी व्रत के दौरान एक बेहतरीन और स्वादिष्ट विकल्प है, खासकर सावन के सोमवार को। यह पौष्टिक कचौड़ी न केवल उपवास के नियमों का पालन करती है, बल्कि स्वाद में भी लाजवाब होती है।
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Recipe: सावन के सोमवार को व्रत रखने वाले भक्तों के लिए कच्चे केले की कचौड़ी एक स्वादिष्ट और पौष्टिक विकल्प है। यह खास व्यंजन बनाने में बेहद आसान है और उपवास के दौरान आपको ऊर्जा से भरपूर रखता है। कच्चे केले को उबालकर, सिंघाड़े के आटे और कुछ मसालों के साथ मिलाकर इन कचौड़ियों को तैयार किया जाता है। इन्हें शुद्ध घी या मूंगफली के तेल में तलकर, दही या व्रत की चटनी के साथ परोसा जाता है। इस सावन के सोमवार को, कच्चे केले की कचौड़ी बनाकर भगवान शिव को भोग लगाएं और अपने उपवास को स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक बनाएं।

सामग्री

कच्चे केले: 4-5 (मीडियम साइज)
सिंघाड़े का आटा: 1 कप
हरी मिर्च: 2-3 (बारीक कटी हुई)
अदरक: 1 इंच टुकड़ा (कद्दूकस किया हुआ)
जीरा: 1 चम्मच
सेंधा नमक: स्वादानुसार
कटी हुई धनिया पत्ती: 2 बड़े चम्मच
तेल: तलने के लिए (शुद्ध घी या मूंगफली का तेल व्रत के लिए उचित होता है)

विधि:

1. कच्चे केले को धोकर छील लें। इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें और प्रेशर कुकर में डालकर पानी के साथ 2-3 सीटी लगाएं ताकि केले नरम हो जाएं।
2. उबले हुए केले को ठंडा होने पर अच्छी तरह से मैश कर लें।
3. मैश किए हुए केले में सिंघाड़े का आटा, बारीक कटी हुई हरी मिर्च, कद्दूकस किया हुआ अदरक, जीरा, सेंधा नमक और कटी हुई धनिया पत्ती डालें। सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर आटा तैयार कर लें।
4. तैयार आटे से छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और इन्हें अपनी हथेली से दबाकर कचौड़ी का आकार दें।
5. कढ़ाई में तेल गर्म करें। जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए, तो उसमें तैयार कचौड़ियों को धीमी आंच पर सुनहरा और क्रिस्पी होने तक तलें।
6. तैयार कचौड़ियों को टिशू पेपर पर निकालकर अतिरिक्त तेल निकाल दें। इन्हें गरमागरम दही या व्रत की चटनी के साथ परोसें।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey →
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