हमारे देश में तुलसी का पौधा केवल एक पौधा नहीं माना जाता, बल्कि आस्था, परंपरा और घर की सकारात्मकता से जुड़ा होता है। लगभग हर घर में तुलसी को सम्मान के साथ रखा जाता है। सुबह-शाम इसकी पूजा होती है और पत्तियों का उपयोग भी किया जाता है। इसलिए जब सर्दियों में तुलसी का पौधा मुरझाने लगता है, पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं या तना कमजोर हो जाता है, तो लोगों को चिंता होना स्वाभाविक है। अधिकतर मामलों में तुलसी के खराब होने की वजह कोई बीमारी नहीं, बल्कि मौसम और देखभाल से जुड़ी छोटी-छोटी गलतियाँ होती हैं। अच्छी बात यह है कि सही जानकारी और हल्की सावधानी से तुलसी को फिर से स्वस्थ रखा जा सकता है।
सर्दियों में तुलसी कमजोर क्यों होने लगती है
सर्दियों के मौसम में तुलसी पर ठंड का असर ज्यादा पड़ता है, खासकर उन इलाकों में जहाँ रात के समय तापमान बहुत गिर जाता है। ऐसे स्थानों पर पाला पड़ने की संभावना रहती है, जो तुलसी की नाजुक पत्तियों को नुकसान पहुँचा सकता है। इसके अलावा ठंड में धूप कम मिलना और जरूरत से ज्यादा पानी देना भी पौधे को कमजोर कर देता है। यह जरूरी है कि हम समझें कि हर जगह पाले की समस्या नहीं होती। कई क्षेत्रों में तुलसी को ठंड से ज्यादा नुकसान कम धूप, गलत पानी देने और ड्रेनेज की कमी से होता है।
गमले में लगी तुलसी को ठंड से कैसे सुरक्षित रखें
अगर तुलसी गमले में लगी है, तो सर्दियों में उसे खुले आंगन या छत पर रातभर रखना सही नहीं माना जाता। शाम होते ही गमले को ऐसी जगह रखना बेहतर होता है, जहाँ ठंडी हवा सीधे न लगे। खिड़की के पास या बालकनी के कोने में रखना ठीक रहता है, लेकिन ध्यान रखें कि वहाँ सुबह कम से कम तीन से चार घंटे धूप जरूर आती हो। जहाँ धूप बिल्कुल नहीं पहुँचती, वहाँ तुलसी धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है। इसलिए जगह चुनते समय हवा और धूप दोनों का संतुलन जरूरी है।
जमीन में लगी तुलसी की सर्दियों में देखभाल
जिन घरों में तुलसी जमीन में लगी होती है, वहाँ उसे अंदर ले जाना संभव नहीं होता। ऐसे में जड़ों को ठंड से बचाने के लिए पौधे के चारों ओर सूखी पत्तियाँ, पुआल या घास बिछाई जा सकती है। इससे मिट्टी का तापमान थोड़ा संतुलित रहता है। रात में बहुत ठंड होने पर हल्का कपड़ा या जूट की बोरी पौधे के ऊपर रखी जा सकती है, लेकिन इसे पत्तियों पर कसकर नहीं बाँधना चाहिए। सुबह धूप निकलते ही यह ढकाव हटा देना जरूरी होता है, ताकि नमी जमा न हो।
सूखी या बीज बन चुकी मंजरी हटाना क्यों जरूरी
तुलसी में जब फूल और बीज आने लगते हैं, तो उसे मंजरी कहा जाता है। अगर यह मंजरी सूख चुकी हो या बीज बनने लगे हों, तो इसे हटाना पौधे के लिए फायदेमंद माना जाता है। ऐसा न करने पर पौधे की बढ़त धीमी हो सकती है। मंजरी हटाने से तुलसी को यह संकेत मिलता है कि उसे आगे भी बढ़ना है। इससे नई पत्तियाँ निकलने में मदद मिलती है और पौधा ज्यादा घना दिखाई देता है।
सर्दियों में नमी और संभावित फंगल समस्या
सर्दियों में सुबह और रात के समय नमी ज्यादा रहती है। कुछ स्थितियों में यह नमी तुलसी के लिए परेशानी बन सकती है। अगर पत्तियाँ काली पड़ने लगें, तना कमजोर दिखे या मिट्टी से बदबू आने लगे, तो यह एक संभावित संकेत हो सकता है कि जड़ों में समस्या है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि काली पत्तियाँ केवल फंगल संक्रमण से ही नहीं, बल्कि ठंड की मार से भी हो सकती हैं। इसलिए जल्दबाजी में किसी एक कारण पर फैसला करना सही नहीं होता।
नीम तेल और जैविक उपायों का सीमित उपयोग
कई बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, हल्का नीम तेल घोल मिट्टी की देखभाल में मदद कर सकता है। इसे बहुत गाढ़ा नहीं रखना चाहिए और महीने में एक बार से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अधिक मात्रा पौधे की जड़ों को नुकसान पहुँचा सकती है। बाजार में मिलने वाले जैविक फफूंदनाशी भी उपलब्ध होते हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर निर्देशों के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है।
किचन में मौजूद लौंग का सावधानी से उपयोग
लौंग को पारंपरिक रूप से कई लोग घरेलू बागवानी में इस्तेमाल करते हैं। माना जाता है कि इसमें ऐसे तत्व होते हैं जो मिट्टी को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इसका उपयोग सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। लौंग को बहुत ज्यादा डालने से मिट्टी की प्राकृतिक गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। इसलिए इसे केवल सहायक उपाय के रूप में ही देखें, मुख्य इलाज के रूप में नहीं।
लौंग का सही और सुरक्षित तरीका
तीन से चार लौंग को हल्का-सा पीसकर महीने में एक बार मिट्टी की ऊपरी सतह में मिलाया जा सकता है। मिट्टी को ज्यादा खोदने या जड़ों को छेड़ने से बचना चाहिए। दूसरा तरीका यह है कि कुछ लौंग को पानी में उबालकर ठंडा करें और छान लें। इस पानी को कभी-कभी मिट्टी में डालना या पत्तियों पर हल्का छिड़काव करना पर्याप्त होता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि छिड़काव बहुत बार न करें और पत्तियाँ पूरी तरह भीगें नहीं।
पानी देने में सबसे ज्यादा होने वाली गलती
सर्दियों में तुलसी को जरूरत से ज्यादा पानी देना सबसे आम गलती मानी जाती है। ठंड में मिट्टी देर से सूखती है, इसलिए रोज पानी देने की जरूरत नहीं होती। जब मिट्टी ऊपर से सूखी लगे, तभी पानी देना सही माना जाता है। हल्का गुनगुना पानी और सुबह का समय सबसे उपयुक्त रहता है। साथ ही यह भी जरूरी है कि गमले में पानी निकलने के लिए नीचे छेद हों, ताकि पानी जमा न हो।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News नहीं करता।





