
पेड़ हमारे जीवन का आधार हैं। ये ऑक्सीजन देते हैं, पर्यावरण को संतुलित रखते हैं और धरती को हरियाली से भरते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंसानों की गगनचुंबी इमारतों और विशाल मूर्तियों से भी ऊंचा एक पेड़ अमेरिका के जंगलों में खड़ा है? इस पेड़ का नाम हाइपेरियन है, जिसे आज की तारीख में दुनिया का सबसे लंबा जीवित पेड़ माना जाता है। इसकी ऊंचाई लगभग 115.92 मीटर (380.3 फीट) है। आसान शब्दों में समझें तो यह पेड़ स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी ऊंचा है।
हाइपेरियन को दुनिया ने बहुत पुराना होने के बावजूद हाल ही में खोजा। साल 2006 में प्राकृतिक विज्ञानियों की एक टीम जब कैलिफोर्निया के घने जंगलों में हाइकिंग कर रही थी, तब उन्हें यह दैत्याकार पेड़ दिखाई दिया।
कहां स्थित है हाइपेरियन?
माप-तौल करने के बाद वैज्ञानिक भी दंग रह गए। उन्हें लगा कि शायद यह रिकॉर्ड में दर्ज किसी भी पेड़ से ज्यादा ऊंचा हो सकता है, और यही सच निकला।
हाइपेरियन अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में मौजूद रेडवुड नेशनल पार्क में पाया जाता है। यह पार्क वैसे भी अपने विशाल कोस्ट रेडवुड्स के लिए दुनिया भर में मशहूर है। कोस्ट रेडवुड दुनिया की सबसे ऊंची पेड़ प्रजाति है और हाइपेरियन इसी परिवार का सदस्य है।
हालांकि, पर्यटकों की भीड़ से बचाने के लिए इस पेड़ का सटीक स्थान गुप्त रखा गया है। माना जाता है कि अगर लोग बड़ी संख्या में वहां पहुंचने लगे तो उनकी गतिविधियों से जड़ों और आसपास की मिट्टी को नुकसान हो सकता है, जिससे पेड़ की उम्र और स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा सकता है।
कितना पुराना है पेड़?
वैज्ञानिक मानते हैं कि हाइपेरियन की उम्र 600 से 800 साल के बीच हो सकती है। यानी जब भारत में मुगल साम्राज्य भी पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ था, तब से यह पेड़ धरती पर खड़ा है। दिलचस्प बात यह है कि कोस्ट रेडवुड प्रजाति के कई पेड़ 2,000 साल से भी अधिक जी सकते हैं।
हाइपेरियन की खासियतें
- ऊंचाई का रिकॉर्ड: 115.92 मीटर लंबा, यह पेड़ धरती का सबसे ऊंचा जीवित पेड़ है।
- खोज का साल: 2006 में वैज्ञानिकों ने इसे खोजा।
- स्थान गुप्त: पर्यावरण की सुरक्षा के लिए इसे आम लोगों से छिपाकर रखा गया है।
- जलवायु से रिश्ता: कोस्ट रेडवुड्स ठंडी, बारिश वाली और कोहरे से भरी जलवायु में सबसे अच्छी तरह पनपते हैं।
- आयु का अनुमान: हाइपेरियन 600-800 साल पुराना है, जबकि इसकी प्रजाति के पेड़ 2,000 साल तक जी सकते हैं।
ऊंचाई
रेडवुड्स की खासियत है कि ये नमी से भरपूर और ठंडी जगहों पर तेजी से बढ़ते हैं। समुद्री तट से उठने वाला कोहरा इन्हें लगातार नमी देता है। यही कारण है कि रेडवुड्स अन्य पेड़ों की तुलना में ज्यादा ऊंचाई तक जा पाते हैं। इसके अलावा, इन पेड़ों की लकड़ी बेहद मजबूत होती है। यही वजह है कि कई सदियों तक तूफानों, बारिश और तेज हवाओं के बावजूद ये टिके रहते हैं।
- स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (न्यूयॉर्क)-लगभग 305 फीट
- कुतुब मीनार (दिल्ली)-लगभग 240 फीट
- हाइपेरियन-380 फीट से भी ज्यादा
इतने विशाल पेड़ अपने आप में प्रकृति की देन हैं, लेकिन इनकी रक्षा करना आसान नहीं है। जंगलों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और इंसानी हस्तक्षेप इनके अस्तित्व पर खतरा बनते जा रहे हैं। यही वजह है कि अमेरिकी प्रशासन ने हाइपेरियन के असली स्थान को सार्वजनिक नहीं किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचेंगे तो मिट्टी दब जाएगी और जड़ें सांस नहीं ले पाएंगी, जिससे पेड़ सूख सकता है।
सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

