बच्चों की परवरिश में सबसे बड़ी गलती क्या है? सद्गुरु ने दिया खास जवाब

Parenting Mistakes: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे न केवल अच्छे संस्कारों से संपन्न हों, बल्कि आत्मविश्वास से भी भरपूर रहें। लेकिन यह कैसे संभव हो? सिर्फ़ डांट-फटकार से नहीं, और न ही हर बात पर जरूरत से ज्यादा लाड़-प्यार करने से। जानें सद्गुरु के अनुसार।
Parenting Mistakes

Parenting Mistakes: बच्चों की अच्छी परवरिश करने का मतलब सिर्फ़ उन्हें भौतिक सुख सुविधाओं का लाभ देना, या फिर शारीरिक विकास तक सीमित नहीं है बल्कि उनके मानसिक भावनात्मक और नैतिक विकास में भी माता-पिता की अहम भूमिका होती। हर माता-पिता की यही ख़्वाहिश होती है कि उनका बच्चा अच्छे-अच्छे संस्कार सीखें, पढ़ाई लिखाई करें, और जीवन में ख़ूब आगे बढ़ें।

ऐसे में माता-पिता के लिए यह ज़िम्मेदारी बनकर उभरता है, कि वे उनके बच्चों के साथ ऐसा कैसा रिश्ता बनाए जिसमें न केवल प्रेम और अनुशासन हो बल्कि खुलापन और समझ भी हो। माता-पिता बच्चों के लिए सिर्फ़ गाइड नहीं, बल्कि उनके सबसे अच्छे दोस्त भी होने चाहिए, ताकि बच्चे अपने मन की हर बात बिना झिझक के शेयर कर सके। इस बारे में सद्‌गुरु, जो एक प्रख्यात योग गुरू प्रेरणादायक वक्ता है उन्होंने भी कई अहम बातें बतायी है।

बच्चों की बातों का मजाक न बनाएं

सद्‌गुरु कहते हैं, जब कभी भी बच्चे माता-पिता से कोई भी बात शेयर करें तो माता-पिता को बच्चों की बातों को ध्यान से सुनना चाहिए ना कि बच्चा समझकर उनकी बातों को नज़रअंदाज़ करना चाहिए। बच्चे भले ही छोटे हो लेकिन वे इन बातों को बहुत अच्छे से समझते हैं। ऐसे में बच्चे महसूस करते हैं कि उनकी बातों को नज़रअंदाज़ किया जाता है यानी उनकी बातों का कोई महत्व नहीं है।

बच्चों को सिर्फ़ किताबी ज्ञान न दें

सद्‌गुरु कहते हैं, माता-पिता को यह बात समझने की आवश्यकता है कि बच्चों को सिर्फ़ किताबी ज्ञान न दें, बल्कि उन्हें जीवन के कई अनुभवों से सिखहाएं और सिखने का मौका दें, उन्हें ज़िंदगी में नई-नई चीज़ें सीखने दें, जिसने कि वे नए नए अनुभवों को प्राप्त कर सके।

प्यार और अनुशासन को बैलेंस करें

सद्‌गुरु कहते हैं कि माता-पिता का सबसे बड़ा कर्त्तव्य यह होता है, कि वे प्यार और अनुशासन का संतुलन बनाए रखें। ज़्यादा लाड़-प्यार बच्चों को बिगाड़ सकता है और कठोर व्यवहार बच्चों को डरा सकता है। ऐसे में इन दोनों का बैलेंस बनाए रखना बहुत ज़रूरी होता है। बच्चों को उनकी गलतियों पर प्यार से सिखाएं, और सही ग़लत में फ़र्क बताएँ।

कंपेयर न करें

सद्‌गुरु कहते हैं कि दुनिया का हर एक बच्चा अलग होता है, इसलिए अपने बच्चे को ख़ुद का व्यक्तित्व बनाने दें, न कि उन्हें हमेशा दूसरों के साथ कंपेयर करें। कंपेयर करने से बच्चा सिर्फ़ हमेशा दूसरों की तरह बनने की कोशिश करता है और ख़ुद के असली व्यक्तित्व को भूलता जाता है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey →
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