लखनऊ के ऐतिहासिक और व्यस्ततम रेलवे स्टेशन चारबाग रेलवे स्टेशन पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर लगा टिन शेड अचानक नीचे गिर गया। सुबह करीब 8 बजे का समय था और प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की आवाजाही सामान्य रूप से चल रही थी। अचानक तेज आवाज के साथ शेड का एक बड़ा हिस्सा गिर पड़ा, जिससे आसपास खड़े यात्री उसकी चपेट में आ गए। इस हादसे में तीन यात्री घायल हो गए, जिनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद यात्रियों में डर और दहशत का माहौल बन गया और लोग इधर-उधर भागने लगे।
सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। घायलों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुरुआती जांच में सामने आया कि प्लेटफॉर्म पर चल रहे निर्माण कार्य के कारण ढांचे की मजबूती पर असर पड़ा था।
RPF और GRP की त्वरित कार्रवाई
हादसे के बाद रेलवे प्रशासन ने तुरंत सक्रियता दिखाई और RPF तथा GRP की टीम ने मिलकर राहत कार्य संभाला। प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर हटाया गया और घायलों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया। अधिकारियों के मुताबिक, तीनों घायलों को पहले आलमबाग स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका प्राथमिक इलाज किया गया। बाद में गंभीर स्थिति को देखते हुए मेडिकल टीम ने उनकी लगातार निगरानी शुरू कर दी।
रेलवे प्रशासन ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद मंडल रेल प्रबंधक (DRM) ने भी घटनास्थल और अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने घायलों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए। इस दौरान रेलवे की मेडिकल टीम भी लगातार सहयोग में लगी रही। मौके पर मौजूद यात्रियों का कहना है कि अगर RPF तुरंत कार्रवाई नहीं करती तो हादसा और बड़ा हो सकता था। इस घटना ने एक बार फिर रेलवे स्टेशनों की संरचनात्मक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
इस हादसे के बाद यात्रियों के बीच रेलवे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। देश के सबसे व्यस्त स्टेशनों में शामिल चारबाग स्टेशन पर इस तरह की घटना ने यात्रियों को झकझोर दिया है। रोजाना हजारों यात्री इस स्टेशन से यात्रा करते हैं और ऐसे में संरचनात्मक लापरवाही गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। यात्रियों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत होने चाहिए थे, जो इस मामले में नजर नहीं आए।
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि देशभर के बड़े स्टेशनों पर चल रहे आधुनिकीकरण कार्यों के बीच सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत करने की जरूरत है। केवल निर्माण कार्य पर ध्यान देने के बजाय यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या रेलवे अपने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के दौरान पर्याप्त सुरक्षा मानकों का पालन कर रहा है या नहीं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट इस मामले में कई अहम खुलासे कर सकती है।






