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EOW की सबसे बड़ी कार्रवाई, LNCT ग्रुप पर 200 करोड़ घोटाले का शिकंजा

Written by:Bhawna Choubey
Published:
200 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा होने के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने LNCT समूह के संचालकों पर शिकंजा कस दिया है। मामले में दस्तावेज जब्त किए गए और वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच की जा रही है। इस कार्रवाई से शहर में हड़कंप मच गया है।
EOW की सबसे बड़ी कार्रवाई, LNCT ग्रुप पर 200 करोड़ घोटाले का शिकंजा

इंदौर शहर एक बार फिर बड़े वित्तीय घोटाले की वजह से सुर्खियों में है। इस बार मामला है 200 करोड़ रुपये से जुड़े एक कथित फर्जीवाड़े का, जिसमें LNCT समूह का नाम सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए समूह के संचालकों और संबंधित संस्थाओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार, EOW की टीम ने छापेमारी कर अहम दस्तावेज और लेन-देन से जुड़े सबूत जब्त किए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बड़े पैमाने पर फर्जी खातों और कागजी लेन-देन के जरिए यह घोटाला किया गया। फिलहाल अधिकारी पूरे मामले की गहन जांच में जुटे हैं और आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना है।

घोटाले का खुलासा और शुरुआती कार्रवाई

EOW की छापेमारी से हड़कंप

EOW की टीम ने इंदौर और भोपाल सहित कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान कई अहम दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए। बताया जा रहा है कि इन कागजों से घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। अधिकारियों का मानना है कि पूरे नेटवर्क में कई नाम और सामने आ सकते हैं।

संचालकों पर लगे गंभीर आरोप

जांच में जो बातें सामने आई हैं, वो चौंकाने वाली हैं। श्री आस्था फाउंडेशन के नाम पर करीब 32 करोड़ रुपये का बैंक लोन लिया गया, लेकिन इस पैसे का इस्तेमाल पढ़ाई या छात्रों के काम में करने के बजाय, इसे एच.के. कल्चुरी ट्रस्ट के पुराने कर्ज चुकाने में खर्च कर दिया गया। यही नहीं, सिर्फ 21 दिनों में 21.90 करोड़ रुपये सीधे पारिवारिक ट्रस्ट का कर्ज उतारने में लगा दिए गए।

इसी तरह, 12.15 करोड़ रुपये का टर्म लोन एलएनसीटी मेडिकल कॉलेज के नाम पर लिया गया था, लेकिन वो भी निजी ट्रस्ट के कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया गया। छात्रों से वसूली गई करीब 8.22 करोड़ रुपये की बस और हॉस्टल फीस को भी सही जगह लगाने के बजाय निजी कंपनियों और परिवार के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इतना ही नहीं, छात्रों के लिए आई 49.74 लाख रुपये की छात्रवृत्ति राशि तक सीधे चौकसे परिवार की कंपनी के खाते में भेज दी गई।

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की रणनीति

EOW इस मामले को हाई-प्रोफाइल घोटाले के रूप में देख रही है। अधिकारी लगातार बैंक खातों, संपत्ति और फंडिंग पैटर्न की जांच कर रहे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि घोटाले की रकम और भी ज्यादा हो सकती है। फिलहाल समूह के कई जिम्मेदार व्यक्तियों से पूछताछ जारी है और जल्द गिरफ्तारी की भी संभावना है।

जनता और निवेशकों पर असर

निवेशकों और परिवारों में बढ़ी चिंता

घोटाले की खबर सामने आते ही निवेशकों और छात्रों के अभिभावकों के बीच बेचैनी बढ़ गई है। LNCT जैसे लंबे समय से भरोसेमंद माने जाने वाले संस्थान पर अब सवाल उठने लगे हैं और विश्वास का आधार कमजोर होता दिख रहा है।

शहरभर में चर्चा का विषय

इंदौर की गलियों से लेकर व्यापारिक जगत तक, हर जगह इस मामले की चर्चा छाई हुई है। लोग इसे प्रदेश के बड़े घोटालों में गिन रहे हैं और तरह-तरह की चर्चाए हो रही हैं।

सरकार और प्रशासन पर बढ़ा दबाव

200 करोड़ रुपये का यह मामला सीधे सरकार और प्रशासन की छवि से जुड़ गया है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि इतने लंबे समय तक इतने बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ होती रहीं और किसी की नज़र क्यों नहीं पड़ी।

 

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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