उफनते दूध में फूंक मारना मासूम को पड़ा भारी, उपचार के दौरान मौत

उफनते दूध में फूंक मारना मासूम को पड़ा भारी, उपचार के दौरान मौत

इंदौर, आकाश धोलपुरे। अक्सर छोटे मासूम बच्चे अपने मम्मी या पापा की नकल करते देखे जा सकते हैं।  बच्चों की ये आदत देखकर परिवार वालों को खुशी भी मिलती है लेकिन कभी कभी बच्चों द्वारा नकल करना न सिर्फ बच्चों पर बल्कि पूरे परिवार पर भारी पड़ सकता है। ऐसा ही एक दर्दनाक हादसा इंदौर में सामने आया है  जिसमें 6 साल के मासूम की मौत हो गई।

दिल दहला देने वाला ये दर्दनाक हादसा इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र का है जहां फीनिक्स टाउनशिप में रहने वाले रामजी प्रसाद का 6 वर्षीय बेटा संजीव अपनी मां रंजू देवी की नकल कर रहा था, तब ही एक हादसा हो गया जिसके बाद पूरा परिवार गमगीन हो गया। दरअसल, शाम के वक्त मां किचन में खाना बनाने गई तब मां ने दूध को गर्म होने के लिए गैस पर रख दिया, इसके बाद वह दूसरे काम में लग गई।

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जब 6 साल के मासूम संजीव ने देखा कि किचन में दूध उफन रहा है तो उसने पटिया लगाया और गैस स्टैंड तक पहुंच गया और प्लास्टिक के पाइप से पतीले में फूंक मार दी जिसके दूध तो पतीले में बैठ गया लेकिन इस बीच बच्चे ने तेजी से सांस खींची तो उफनता हुआ गर्म दूध पाइप के जरिये बच्चे के मुंह में चला गया और शरीर के अंदर के हिस्सों में घुस गया। दूध शरीर में जाते ही बच्चा चिल्लाया।  बच्चे की हालत बिगड़ते देख परिजन उसे इलाज के लिए अरविन्दो अस्पताल ले गए जहां तीन दिन तक चले इलाज के बाद मासूम की मौत हो गई। लसूड़िया थाना के जांच अधिकारी उदय पाल सिंह कुशवाह ने बताया कि हादसे के बाद मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है।

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Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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