मध्य प्रदेश के लगभग 10 हजार होमगार्ड को हाईकोर्ट से मिली बड़ी खुशखबरी, कॉल ऑफ प्रक्रिया को किया गया समाप्त

मध्य प्रदेश के करीब 10 हजार होमगार्ड को लंबे समय बाद राहत मिली है। जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा 26 सितंबर को राज्य सरकार की कॉल ऑफ प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। अब 12 महीने होमगार्ड को ड्यूटी पर रखा जाएगा। इसके अलावा उन्हें सभी लाभ भी प्राप्त हो सकेंगे।
मध्य प्रदेश के लगभग 10 हजार होमगार्ड को हाईकोर्ट से मिली बड़ी खुशखबरी, कॉल ऑफ प्रक्रिया को किया गया समाप्त

आज 26 सितंबर को मध्य प्रदेश के लगभग 10,000 होमगार्ड को हाईकोर्ट की ओर से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को जबलपुर हाईकोर्ट की डिविजनल बेंच द्वारा एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया, जिसमें राज्य सरकार की कॉल ऑफ सिस्टम प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके चलते अब 12 महीने नियमित रूप से प्रदेश के सभी होमगार्ड जवानों को काम मिलेगा। इसके अलावा उन्हें सभी प्रकार के लाभ भी प्राप्त होंगे। साथ ही 2020 से कॉल ऑफ किए गए होमगार्ड्स का वेतन भी देने का आदेश दिया गया है।

दरअसल, 1962 के बाद से होमगार्ड नियमित सेवाएं दे रहे हैं, मगर 2 से 3 महीने हर साल उन्हें कॉल ऑफ के चलते घर भेज दिया जाता है। इस अवधि के दौरान उन्हें न तो वेतन मिलता है और न ही काम, जिसके चलते वे दोनों से ही वंचित रह जाते हैं। हालांकि दूसरी तरफ संगठन के अन्य अधिकारी और सैनिक पूरे वर्ष काम करते हैं। यही कारण था कि होमगार्ड ने अपना विरोध जताया और 2008 में मानव अधिकार आयोग तक शिकायत की।

लगभग 486 याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गई 

जानकारी दें दे कि प्रदेश भर में इस मामले में लगभग 486 याचिकाएं व्यक्तिगत तौर पर हाईकोर्ट में दायर की जा चुकी थीं। इन याचिकाओं में कॉल ऑफ की व्यवस्था को खत्म करने की मांग की गई थी और इसे भेदभावपूर्ण बताया गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह मौलिक अधिकारों का हनन करती है। इन याचिकाओं को देखते हुए चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच ने इस पर सुनवाई की और 29 जुलाई 2025 को हियरिंग रिजर्व रखते हुए फैसला सुरक्षित कर लिया था। अब हाईकोर्ट की ओर से इस मामले में फैसला सुनाया गया है।

रिट अपील और एसएलपी भी दाखिल की गई थी

दरअसल, यह मामला 2011 में हाईकोर्ट में पहुंचा था। हाईकोर्ट की ओर से उस दौरान भी यह साफ किया गया था कि कॉल ऑफ प्रक्रिया समाप्त की जाए और शासन द्वारा नए नियम बनाए जाएं। लेकिन सरकार की ओर से इस आदेश को चुनौती दी गई और रिट अपील और एसएलपी भी दाखिल की गई। हालांकि उच्च अदालत द्वारा भी हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा गया था। हाईकोर्ट द्वारा एक कमेटी बनाई गई थी और नए नियम बनाए गए थे। इन नियमों में दो माह का कॉल ऑफ प्रावधान रखा गया था, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने फिर इसे चुनौती दी थी। इसके बाद इसे संशोधित किया गया और तीन वर्ष में दो माह का कॉल ऑफ प्रावधान दिया गया था। लेकिन इसके बाद भी याचिकाकर्ताओं द्वारा इस फैसले को चुनौती दी गई थी। अब सरकार की कॉल ऑफ प्रक्रिया को हाईकोर्ट ने समाप्त कर दिया है।

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4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev →
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