मध्यप्रदेश के मैहर शहर में फेयरवेल पार्टी का जश्न उस वक्त डर और चिंता में बदल गया जब नाबालिग छात्रों ने सड़कों को स्टंट का मैदान बना दिया। खुलेआम नियमों की अनदेखी करते हुए छात्र तेज रफ्तार कारों में झूमते और जान जोखिम में डालते नजर आए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद शहर में हड़कंप मच गया है।
फेयरवेल रैली में बदला शहर का माहौल
जानकारी के अनुसार यह मामला मैहर शहर का है,जहां सांदीपनी शासकीय विद्यालय के कुछ छात्र-छात्राओं ने फेयरवेल पार्टी के नाम पर सड़कों पर वाहनों की रैली निकाल दी। यह रैली किसी तय व्यवस्था या अनुमति के बिना शहर की मुख्य सड़कों से गुजरी। शुरुआत में यह एक सामान्य जुलूस जैसा लग रहा था लेकिन कुछ ही देर में यह खतरनाक हुड़दंग में बदल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रैली में शामिल छात्र तेज आवाज में संगीत बजाते हुए आगे बढ़ रहे थे। सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालक और राहगीर अचानक इस माहौल से घबरा गए। कई लोगों ने अपने वाहन रोक लिए क्योंकि छात्रों की हरकतें किसी भी समय हादसे का कारण बन सकती थीं।
नाबालिग छात्रों द्वारा लग्जरी कारों में स्टंट
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि रैली में शामिल कई छात्र नाबालिग थे और वे खुद लग्जरी कारें चलाते नजर आए। कुछ छात्र चलती कारों की छतों पर बैठे थे, तो कुछ तेज रफ्तार वाहनों के दरवाजों से लटककर स्टंट कर रहे थे। बिना लाइसेंस वाहन चलाना कानूनन अपराध है। इसके बावजूद छात्रों में न कानून का डर दिखा और न अपनी सुरक्षा की चिंता। न हेलमेट, न सीट बेल्ट और न ही किसी तरह के सुरक्षा मानकों का पालन किया गया। यह लापरवाही सिर्फ छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि सड़क पर मौजूद हर व्यक्ति के लिए खतरा बन गई।
वायरल वीडियो के बाद पुलिस पर उठे सवाल
पूरे घटनाक्रम को किसी राहगीर ने अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद शहरभर में चर्चा शुरू हो गई कि आखिर इतनी देर तक यह सब चलता रहा और पुलिस कहां थी।
स्थानीय लोगों की नाराजगी और सख्त कार्रवाई की मांग
मैहर के स्थानीय नागरिकों में इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि फेयरवेल जैसे आयोजनों का मकसद खुशी और यादें बनाना होता है, न कि कानून को हाथ में लेना। लोगों ने मांग की है कि इस मामले में सिर्फ छात्रों ही नहीं, बल्कि वाहन मालिकों और आयोजकों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए।





