बिहार के सरकारी कर्मचारियों के लिए काम की खबर है। राज्य की नीतीश कुमार सरकार ने सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सेवा नियमावली में संशोधन किया है। इसके लिए गुरुवार (29 जनवरी 2026) को हुई कैबिनेट बैठक में बिहार सरकार सेवक आचार संशोधन नियमावली 2026 को मंजूरी दी गई है। यह नियमावली राज्यभर में तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
नए नियमों के तहत कर्मचारियों को सोशल मीडिया अकाउंट (फेसबुक, व्हाट्सऐप, लिंक्डइन और एक्स), पोस्ट, वीडियो, राय और गोपनीय जानकारी साझा करने पर सावधानी बरतने को कहा गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंद्र ने बताया कि इस नियमावली के तहत सरकारी कर्मियों के लिए सोशल मीडिया आचरण से जुड़े करीब डेढ़ दर्जन नियम तय किए गए हैं। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित कर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी और दंड का भी प्रावधान है। किसी भी कर्मी के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन निर्धारित सीमाओं के भीतर रहकर ही इसका उपयोग करना होगा।पहले नियमावली में फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का अलग से उल्लेख नहीं था।
नए नियम के प्रमुख बिंदु-
- राज्य कर्मियों को फेसबुक, व्हाट्सऐप, लिंक्डइन और एक्स समेत सभी सोशल मीडिया पर पोस्ट करते समय सावधानी बरतनी होगी।
- कोई भी कर्मचारी स्वयं या छद्म नाम (फेक अकाउंट) से बनाए गए किसी भी सोशल मीडिया अकाउंट पर सरकारी प्रतीक, सरकारी फोन नंबर, पदनाम या अन्य आधिकारिक पहचान का उपयोग नहीं करेंगे।
- अश्लील, भड़काऊ या संवेदनशील सामग्री पोस्ट करने पर प्रतिबंध रहेगा।
- किसी भी प्रकार के संवेदनशील भाषण, वीडियो, ऑडियो या अन्य सामग्री को साझा नहीं किया जाएगा।
- किसी राजनीतिक, सरकारी या अन्य विषय पर व्यक्तिगत दृष्टिकोण या टिप्पणी करने से कर्मचारियों को सावधानी बरतनी होगी।
- राज्य सरकार की उपलब्धियों को व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाएगा।
- किसी मीडिया संस्थान या सरकारी संस्था की आलोचना या टिप्पणी भी सोशल मीडिया पर नहीं की जा सकेगी।
- किसी सरकारी कार्यक्रम का सीधा प्रसारण, किसी मामले की सुनवाई या पीड़ित का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा नहीं किया जाएगा।
- सरकारी बातचीत या वेबिनार से संबंधित जानकारी भी सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं की जाएगी।
- ड्यूटी के दौरान या कार्यस्थल से संबंधित कंटेंट बनाना ‘सख्त वर्जित’ है। किसी भी प्रकार की रील, वीडियो, फ़ोटो या बातचीत को लाइव प्रसारित करना नियमों के खिलाफ माना जाएगा।
- यौन शोषण की शिकार किसी पीड़िता की पहचान उजागर करने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। जाति, धर्म या किसी समुदाय के विरुद्ध टिप्पणी करने से बचना होगा।
- सरकारी नीतियों, योजनाओं, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों पर व्यक्तिगत राय देना प्रतिबंधित रहेगा।
- किसी भी तरह की संवेदनशील या गोपनीय जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं की जा सकेगी।





