शाहडार जंगल में बाघ के दीदार का जुनून: गाड़ियों का जाम, जंगल में आग और बदहाल सड़कें बनीं खतरे की घंटी

कटनी जिले के शाहडार जंगल में बाघ की लगातार मौजूदगी ने वन्यजीव प्रेमियों को अपनी ओर खींच लिया है। टेसू रिसोर्ट के आसपास रोजाना दर्जनों वाहन पहुंच रहे हैं, लेकिन बढ़ती भीड़ के बीच जंगल में आग लगने की घटनाएं, खराब सड़कें और सुरक्षा इंतजामों की कमी चिंता का विषय बनती जा रही है। स्थानीय लोग और पर्यटक प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
Shahdar Forest,

शाहडार का घना जंगल इन दिनों मध्य प्रदेश के वन्यजीव प्रेमियों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कटनी जिले के ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र में स्थित इस इलाके में पिछले कई महीनों से बाघ की लगातार मौजूदगी दर्ज की जा रही है। बाघ की एक झलक पाने के लिए आसपास के जिलों के साथ-साथ दूसरे शहरों से भी लोग यहां पहुंच रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि सुबह और शाम के समय जंगल के रास्तों पर गाड़ियों की लंबी कतारें दिखाई देने लगी हैं। बढ़ती भीड़ ने जहां पर्यटन की संभावना बढ़ाई है, वहीं सुरक्षा और वन संरक्षण को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

करीब तीन से चार महीने पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें एक बाघ जंगल के भीतर बने शिव मंदिर की दीवार से सिर रगड़ता नजर आया था। इस वीडियो के सामने आने के बाद शाहडार जंगल अचानक सुर्खियों में आ गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि तब से बाघ लगातार इसी इलाके में देखा जा रहा है। वन विभाग के अनुसार यह क्षेत्र पहले से ही वन्यजीवों की गतिविधियों के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन हाल के महीनों में बाघ की मौजूदगी ने लोगों का उत्साह और बढ़ा दिया है। इसी वजह से रोजाना बड़ी संख्या में वाहन जंगल के आसपास पहुंच रहे हैं।

शाहडार जंगल का वन्यजीव संसार और बढ़ता पर्यटक दबाव

शाहडार जंगल केवल बाघ के लिए ही नहीं, बल्कि जैव विविधता के लिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां तेंदुआ, भालू, हिरण, नीलगाय, मोर, बंदर और दुर्लभ पैंगोलिन जैसे वन्यजीव भी पाए जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संवेदनशील वन क्षेत्र में अनियंत्रित पर्यटक गतिविधियां वन्यजीवों के व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं। लगातार वाहनों की आवाजाही, हॉर्न और लोगों की भीड़ जानवरों के प्राकृतिक वातावरण में बाधा पैदा करती है। कई बार वन्यजीव सड़क पार करते समय दुर्घटनाओं का भी शिकार हो सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि जंगल में आने वाले पर्यटक तय नियमों का पालन करें और वन विभाग भी निगरानी को मजबूत बनाए। यदि ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देना है तो वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की जिम्मेदारी दोनों को साथ लेकर चलना होगा।

जंगल में आग और खराब सड़कें बनीं बड़ी चिंता

पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बीच शाहडार क्षेत्र की बुनियादी व्यवस्थाएं कमजोर नजर आ रही हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक जंगल में कई बार आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। गर्मी और सूखी वनस्पति के कारण छोटी सी चिंगारी भी बड़े इलाके को प्रभावित कर सकती है। इससे न केवल पेड़-पौधों को नुकसान होता है बल्कि जंगल में रहने वाले जानवरों की जान पर भी खतरा मंडराता है।

वहीं टेसू रिसोर्ट से कुसेरा नाका की ओर जाने वाले मार्ग पर पुलिया के पास बना बड़ा गड्ढा भी दुर्घटना का कारण बन सकता है। बाघ देखने की उत्सुकता में कई वाहन चालक तेज रफ्तार से गुजरते हैं, जिससे हादसे की आशंका और बढ़ जाती है। स्थानीय नागरिकों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि अगर समय रहते सड़क की मरम्मत, आग रोकने के इंतजाम और ट्रैफिक नियंत्रण की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में कोई बड़ी घटना सामने आ सकती है। उनका मानना है कि शाहडार जंगल में पर्यटन बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा, वन संरक्षण और बुनियादी सुविधाओं पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है। तभी यह क्षेत्र वन्यजीव प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए सुरक्षित और आकर्षक गंतव्य बन सकेगा।

Bhawna Choubey
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